दोगुने पैसे और महंगे ईनाम का लालच देकर करोड़ों रुपए की ठगी, 3 हजार महिलाएं बनीं शिकार

जिला ऊना के उपमंडल अम्ब व गगरेट में कथित तौर पर करोड़ों रुपए की एक बड़ी वित्तीय ठगी का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पंजाब के जिला होशियारपुर के अधीन पड़ते एक कस्बे की एक महिला द्वारा संचालित नैटवर्क ने अम्ब व गगरेट के विभिन्न गांवों की करीब 3 हजार महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर लगभग 5 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया है

Jun 29, 2026 - 13:06
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दोगुने पैसे और महंगे ईनाम का लालच देकर करोड़ों रुपए की ठगी, 3 हजार महिलाएं बनीं शिकार
यंगवार्ता न्यूज ऊना 29 जून, 2026 : 
 

जिला ऊना के उपमंडल अम्ब व गगरेट में कथित तौर पर करोड़ों रुपए की एक बड़ी वित्तीय ठगी का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पंजाब के जिला होशियारपुर के अधीन पड़ते एक कस्बे की एक महिला द्वारा संचालित नैटवर्क ने अम्ब व गगरेट के विभिन्न गांवों की करीब 3 हजार महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर लगभग 5 करोड़ रुपए की ठगी को अंजाम दिया है। हालांकि इस राशि और पीड़ितों की संख्या की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि ठगी का शिकार बनी महिलाओं में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाएं शामिल हैं। इनमें से कई महिलाओं ने बेहतर भविष्य और जल्दी आर्थिक लाभ की उम्मीद में कर्ज लेकर भी इस योजना में पैसा लगाया था। जानकारी के अनुसार नैटवर्क को पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया था।

पहले सीमावर्ती क्षेत्रों की महिलाओं को जोड़ा गया, फिर उन्हें पदोन्नति और कमीशन का लालच देकर नए सदस्य जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई। जो सदस्य अधिक लोगों को जोड़ता था, उसे संगठन में ऊंचा पद और आर्थिक लाभ दिया जाता था। इसी कारण यह नैटवर्क तेजी से गांव-गांव फैलता चला गया। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक समूह में करीब 100 महिलाओं को शामिल किया जाता था। उनसे 15 माह तक हर महीने 1500 से 5000 रुपए तक की राशि जमा करवाई जाती थी। प्रत्येक माह बैठक आयोजित होती थी, जिसमें पर्ची निकालकर किसी सदस्य को स्कूटी, सोफा सैट, डाइनिंग टेबल, अलमारी सहित अन्य आकर्षक घरेलू उपहार दिए जाते थे। शुरूआती दौर में कई महिलाओं को ईनाम मिलने से लोगों का विश्वास लगातार बढ़ता गया और बड़ी संख्या में महिलाएं इस योजना से जुड़ती चली गईं। हिमाचल-पंजाब सीमा से सटे होने का भी इस नैटवर्क ने पूरा लाभ उठाया।

बताया जा रहा है कि सबसे पहले पंजाब सीमा से सटे दौलतपुर क्षेत्र के अधीन पड़ते सीमावर्ती गांवों की महिलाओं को योजना से जोड़ा गया। बाद में इन्हीं महिलाओं के माध्यम से पूरे उपमंडल अम्ब व गगरेट क्षेत्र में सदस्य बनाए गए। हिमाचल में बढ़ती सदस्य संख्या और अच्छी वसूली के बाद संचालकों ने अम्ब मुख्यालय में भी कार्यालय खोल लिया। यहां होटलों में नियमित बैठकें आयोजित होने लगीं। जिन सदस्यों की ईनामी पर्ची निकल जाती थी, उनकी किस्त बंद कर उन्हें किसी दूसरी योजना में जोड़ दिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया से लोगों को यह विश्वास हो गया कि संस्था पूरी तरह विश्वसनीय है। करीब डेढ़-2 वर्ष तक सबकुछ सामान्य चलता रहा लेकिन लगभग एक वर्ष से संस्था के संचालक कथित रूप से भूमिगत हो गए।

चर्चा है कि संस्था की संचालिका पैसे लेकर विदेश चली गई है। क्षेत्र में उसके साथ काम करने वाले कई स्थानीय पदाधिकारी और एजैंट भी अब लोगों के संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं। अब ठगी की शिकार महिलाएं अपने पैसे वापस मिलने की उम्मीद में भटक रही हैं। कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं क्योंकि उन्होंने उधार और कर्ज लेकर रकम जमा करवाई थी। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्हें स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों ने योजना की विश्वसनीयता का भरोसा दिलाया था लेकिन अब कोई भी जवाब देने को तैयार नहीं है।

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