ग्लोबल प्लास्टिक प्रदूषण पर शिमला में हुआ मंथन , हिमाचल में प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में उत्पन्न हो रहा प्लास्टिक कचरा 

 उपायुक्त कार्यालय के रोजना हॉल में द इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (आईएमआई) के राज्य अध्याय - सतत विकास मंच हिमाचल प्रदेश द्वारा 'वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने' के विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व , उपायुक्त शिमला डॉ एस एन जोशी ने की।  कार्यशाला में प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीरता पर प्रकाश डाला गया तथा समाज में जागरूकता फैलाना और इसके समाधान के लिए विस्तृत विचार विमर्श किया गया

Jun 12, 2025 - 18:39
Jun 12, 2025 - 18:50
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ग्लोबल प्लास्टिक प्रदूषण पर शिमला में हुआ मंथन , हिमाचल में प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में उत्पन्न हो रहा प्लास्टिक कचरा 
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media
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 यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  12-06-2025 

 उपायुक्त कार्यालय के रोजना हॉल में द इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव (आईएमआई) के राज्य अध्याय - सतत विकास मंच हिमाचल प्रदेश द्वारा 'वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने' के विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व , उपायुक्त शिमला डॉ एस एन जोशी ने की।  कार्यशाला में प्लास्टिक प्रदूषण की गंभीरता पर प्रकाश डाला गया तथा समाज में जागरूकता फैलाना और इसके समाधान के लिए विस्तृत विचार विमर्श किया गया। द इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव -एसडीऍफ़एचपी  के सदस्यों एवं पर्यावरणविदों ने हाइब्रिड माध्यम से भी हिस्सा लिया तथा 'वैश्विक प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करने' के विषय पर चर्चा की गई। इस दौरान प्लास्टिक कचरे के खतरों और इसके पर्यावरण, जैवविविधता तथा मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की। 
विचार विमर्श के दौरान कहा गया कि हमें अपनी जीवनशैली में परिवर्तन लाकर सिंगल यूज़ प्लास्टिक के प्रयोग को कम करना होगा ताकि इस से होने वाले दुष्प्रभाव को रोका जा सके। सेवानिवृत भारतीय प्रशासनिक अधिकारी डॉ दिनेश मल्होत्रा ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से विश्व पर्यावरण दिवस 2025 की थीम पर विस्तृत बात रखी। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। वर्ष 2018-19 में, राज्य ने लगभग 3.36 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न किया। यह आंकड़ा राज्य में उत्पन्न होने वाले प्लास्टिक कचरे की अत्यधिक मात्रा को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं जिसमे सिंगल यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया गया है। 2019 से "बाय-बैक नीति" शुरू की गई। पॉलीथिन हटाओ - पर्यावरण बचाओ जैसे स्वच्छता अभियानों की शुरुआत की गई।  
विकल्पों को बढ़ावा दिया गया, जैसे पत्तों की थाली बनाने की मशीन वितरित करना और सड़क निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग करना। प्लास्टिक पर विशेष राज्य कानून बनाए गए।उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से यह स्पष्ट होता है कि राज्य ने प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण पर देश तथा विश्व की स्थिति पर भी अपनी बात रखी की किस तरह से प्लास्टिक प्रदुषण बढ़ता जा रहा है और हमारे स्वाथ्य के लिए हानिकारक है। एसडीऍफ़एचपी के प्रदेश सचिव, पूर्व नगर निगम आयुक्त शिमला एवं पूर्व निदेशक, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग डॉ एमपी सूद ने सभी लोगों का स्वागत किया तथा प्लास्टिक प्रदुषण पर अपनी बात रखी। 
द इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्य सचिव अरुणाचल प्रदेश रमेश नेगी ऑनलाइन माध्यम से कार्यशाला में जुड़े तथा प्लास्टिक प्रदुषण पर अपनी विस्तृत बात रखी। कार्यशाला का आयोजन आईएमआई के राज्य अध्याय द्वारा किया गया, जो कि हिमालयी क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध एक अग्रणी संस्था है। इस अवसर पर पूर्व सांसद सिक्किम पीडी राय , पूर्व अध्यक्ष द इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव सुशील रमोला, विभिन्न विभागों के अधिकारी , स्वैच्छिक संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

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