यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 05-07-2026
छात्र अभिभावक मंच हिमाचल प्रदेश ने सरकारी सीबीएसई स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्तियों में देरी पर कड़ा रोष जाहिर किया है। मंच का मानना है कि इस से बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है व उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। मंच के संयोजक विजेंद्र मेहरा व सह संयोजक विवेक कश्यप ने कहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने सरकारी सीबीएसई स्कूलों में नियुक्तियों के लिए प्रारंभ से स्पष्ट नीति बनाई गई थी कि मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों को उनकी पसंद के विद्यालयों में नियुक्ति दी जाएगी। मेरिट सूची भी जारी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद आज तक चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं दी गई।
इससे यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि जब नीति पहले से स्पष्ट थी , तो नियुक्तियों में इतनी देरी क्यों की जा रही है। राज्य सरकार ने अभी तक सीबीएसई स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम की किताबों को भी विद्यार्थियों को उपलब्ध नहीं करवाया है। इस कारण अभिभावकों व बच्चों को पाठ्यक्रम को इंटरनेट से डाउनलोड करके फोटो स्टेट करना पड़ रहा है जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। प्रदेश सरकार की इस देरी का सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है। सरकार द्वारा घोषित सरकारी सीबीएसई स्कूल प्रधानाचार्यों व शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं क्योंकि इन स्कूलों से पहले ही बहुत सारे शिक्षक हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में अपना स्थानांतरण करवा चुके हैं और जो शिक्षक इन स्कूलों में वर्तमान में कार्यरत हैं उनकी भी जनगणना सर्वेक्षण में ड्यूटी लगी हुई है जिससे बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
इसके कारण कई अभिभावकों ने मजबूरीवश अपने बच्चों का प्रवेश सीबीएसई स्कूलों से अन्य सरकारी अथवा निजी विद्यालयों में करवा दिया है। यदि समय रहते मेरिट आधार पर ये नियुक्तियां हुई होतीं तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। इस सबसे सरकार द्वारा सीबीएसई स्कूलों के संचालन के लिए उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बनाई गई पांच सदस्यीय कमेटी जिसमें शिक्षा मंत्री, तकनीकी शिक्षा मंत्री, राजस्व व बागवानी मंत्री, शिक्षा सचिव शामिल हैं , उसकी कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस समिति की रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक किया जाए।
उन्होंने मांग की है कि शिक्षकों की काउंसलिंग करके बिना किसी देरी के मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों को उनकी निर्धारित नीति के अनुसार तुरंत नियुक्ति प्रदान की जाए और सभी सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर की जाए। उन्होंने चेताया है कि यदि सरकार शीघ्र नियुक्तियां नहीं करती है और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ ऐसा ही खिलवाड़ जारी रहता है , तो छात्र , अभिभावक एवं छात्र अभिभावक मंच सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।