बैंक बचाने के लिए नहीं दे सकते देवालयों का पैसा , मंदिर का चढ़ावा भगवान की संपत्ति, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों के चढ़ावे के इस्तेमाल पर शुक्रवार को बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर का पैसा भगवान का है और पैसे की तंगी से जूझ रहे कोऑपरेटिव बैंकों को सहारा देने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (सीजेआई) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह तीखी टिप्पणी कुछ कोऑपरेटिव बैंकों की अपील पर सुनवाई करते हुए की

Dec 6, 2025 - 10:58
Dec 6, 2025 - 11:34
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बैंक बचाने के लिए नहीं दे सकते देवालयों का पैसा , मंदिर का चढ़ावा भगवान की संपत्ति, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश
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न्यूज़ एजेंसी - नई दिल्ली   06-12-2025

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों के चढ़ावे के इस्तेमाल पर शुक्रवार को बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि मंदिर का पैसा भगवान का है और पैसे की तंगी से जूझ रहे कोऑपरेटिव बैंकों को सहारा देने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस सूर्यकांत (सीजेआई) और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह तीखी टिप्पणी कुछ कोऑपरेटिव बैंकों की अपील पर सुनवाई करते हुए की। 
इन अपीलों में केरल हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बैंकों से थिरुनेली मंदिर देवस्वोम को जमा रकम वापस करने को कहा गया था। सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि आप मंदिर के पैसे का इस्तेमाल बैंक को बचाने के लिए करना चाहते हैं? यह निर्देश देने में क्या गलत है कि मंदिर का पैसा, एक कोऑपरेटिव बैंक में रखने के बजाय, जो बड़ी मुश्किल से चल रहा है, एक स्वस्थ नेशनलाइज्ड बैंक में जाए, जो ज्यादा से ज्यादा ब्याज दे सके। 
सीजेआई ने कहा कि मंदिर का पैसा देवता का है और इसलिए पैसे को सिर्फ मंदिर के हितों के लिए बचाया , सुरक्षित और इस्तेमाल किया जाना चाहिए और यह किसी कोऑपरेटिव बैंक के लिए इनकम या गुजारे का जरिया नहीं बन सकता। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिकाएं मनंतावडी को-ऑपरेटिव अर्बन सोसाइटी लिमिटेड और थिरुनेली सर्विस कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने दायर की थीं। 
हाई कोर्ट ने पांच कोऑपरेटिव बैंकों को देवास्वोम के फिक्स्ड डिपॉजिट बंद करने और दो महीने के अंदर पूरी रकम वापस करने का निर्देश दिया था, क्योंकि बैंकों ने मैच्योर डिपॉजिट जारी करने से बार-बार मना कर दिया था।

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