दूध-कुरकुरे के पैकेट में चिट्टा सप्लाई, 1.25 करोड़ के ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा, मेन सप्लायर फरीदाबाद से गिरफ्तार

दूध और कुरकुरे के पैकेटों में राजधानी शिमला में चिट्टे की सप्लाई पहुंच रही थी। शिमला पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सप्लायर को हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है

Jun 11, 2026 - 13:20
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दूध-कुरकुरे के पैकेट में चिट्टा सप्लाई, 1.25 करोड़ के ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा, मेन सप्लायर फरीदाबाद से गिरफ्तार
यंगवार्ता न्यूज शिमला 11 जून, 2026 : 

दूध और कुरकुरे के पैकेटों में राजधानी शिमला में चिट्टे की सप्लाई पहुंच रही थी। शिमला पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए मुख्य सप्लायर को हरियाणा के फरीदाबाद से गिरफ्तार किया है। इस नेटवर्क के जरिए पिछले तीन महीनों में करीब 1.25 करोड़ रुपये का लेन-देन सामने आया है। पुलिस थाना बालूगंज में दर्ज अभियोग संख्या 27/2026 के तहत चल रही जांच के दौरान यह सफलता मिली है। मामले की शुरुआत 24 अप्रैल, 2026 को हुई थी, जब पुलिस ने अविनाश चौहान (37) के कब्जे से लगभग सात ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया था। इसके बाद जांच आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने विशाल यादव और उसके भाई जय प्रकाश यादव, दोनों निवासी भोजपुर (बिहार), को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच में सामने आया कि रवि अहिरवार (21), निवासी छतरपुर (मध्य प्रदेश) और वर्तमान में बल्लभगढ़ (फरीदाबाद) में रह रहा था, इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख डिस्ट्रीब्यूटर था।

पुलिस ने उसे गत पांच जून को फरीदाबाद से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से पुलिस रिमांड हासिल किया गया। एसएपी शिमला गौरव सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि रवि इस नेटवर्क में कमीशन के आधार पर काम करता था और पिछले एक वर्ष में करीब 50 बार शिमला आकर ड्रग्स सप्लाई की गतिविधियों में शामिल रहा। रवि वर्ष 2025 से मोहाली क्षेत्र में रहकर हिमाचल में हेरोइन की सप्लाई कर रहा था। वह शिमला के आईएसबीटी टुटीकंडी व आसपास के इलाकों में दूध, कुरकुरे और अन्य खाली पैकेटों में मादक पदार्थ छिपाकर रखता था। इसके बाद वह संबंधित स्थानों की वीडियो बनाकर मुख्य संचालक विशाल को भेजता था। भुगतान की पुष्टि होने के बाद खरीदारों को लोकेशन साझा की जाती थी। वर्ष 2026 में 48 लोगों को बैकवर्ड लिंकज के आधार पर गिरफ्तार किया है। 37 ड्रग सप्लाई नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।

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