हिमाचल को CRIF के तहत 239.45 करोड़ रुपए की मंजूरी, विक्रमादित्य सिंह ने जताया नितिन गडकरी का आभार
हिमाचल प्रदेश को CRIF 2026-27 के तहत भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय से 239.45 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। इस राशि से प्रदेश की दो महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का उन्नयन किया जाएगा। लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इसे प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग के त प्रयासों का परिणाम बताया है।
यंगवार्ता न्यूज - शिमला 31 जुलाई, 2026 :
हिमाचल प्रदेश को CRIF 2026-27 के तहत भारत सरकार के सड़क परिवहन मंत्रालय से 239.45 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति मिली है। इस राशि से प्रदेश की दो महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं का उन्नयन किया जाएगा। लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने इसे प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग के त प्रयासों का परिणाम बताया है।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि राज्य सरकार और लोक निर्माण विभाग लगातार इन परियोजनाओं को भारत सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाते रहे, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश को यह स्वीकृति मिली है। विक्रमादित्य सिंह ने शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का भी सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि ये केवल सड़क परियोजनाएं नहीं, बल्कि किसानों और बागवानों के भविष्य में किया गया निवेश हैं। बेहतर सड़क संपर्क से बागवानी क्षेत्र को नई गति मिलेगी और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।
विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि स्वीकृत परियोजनाओं में छैला–नेरिपुल–यशवंत नगर–कुमारहट्टी सड़क के उन्नयन के लिए 203.52 करोड़ रुपए और टिक्कर–जरोल–खमाड़ी सड़क के पहले पैकेज में छूटे 16 किलोमीटर हिस्से के उन्नयन के लिए 35.93 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। टिक्कर–जरोल–खमाड़ी सड़क के शेष 16 किलोमीटर हिस्से के स्वीकृत होने से पूरा मार्ग विकसित हो सकेगा। इससे विशेष रूप से रामपुर विधानसभा क्षेत्र के किसानों और बागवानों को राहत मिलेगी और बागवानी उपज के परिवहन में सुविधा होगी।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि छैला–नेरिपुल–यशवंत नगर–कुमारहट्टी सड़क ठियोग, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू और चौपाल जैसे प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्रों की महत्वपूर्ण सड़क है। इसके उन्नयन से सेब और अन्य बागवानी उत्पादों के परिवहन में तेजी आएगी, परिवहन लागत घटेगी, किसानों और बागवानों को बेहतर बाजार मिलेंगे तथा क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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