लोग राहत का बेसब्री से कर रहे हैं इंतजार , एक हफ्ते बाद भी नहीं पहुंची सरकार : जयराम ठाकुर

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आपदा ग्रस्त जंजैहली  क्षेत्र का हवाई सर्वे किया। रास्ता बंद होने की वजह से वहां पहुंचना बहुत मुश्किल था। जिसके कारण उन्होंने चॉपर के लिए आग्रह किया और रैनगलू हेलीपैड से उड़ान भर कर जंजैहली के खनुखली के हेलीपैड पर उतरे। इसके बाद उन्होंने गांव–गांव जाकर आपदा प्रभावित लोगों से मिले और राहत कार्यों का जायजा लिया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए

Jul 7, 2025 - 19:09
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लोग राहत का बेसब्री से कर रहे हैं इंतजार , एक हफ्ते बाद भी नहीं पहुंची सरकार : जयराम ठाकुर
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यंगवार्ता न्यूज़ - मण्डी  07-07-2025
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आपदा ग्रस्त जंजैहली  क्षेत्र का हवाई सर्वे किया। रास्ता बंद होने की वजह से वहां पहुंचना बहुत मुश्किल था। जिसके कारण उन्होंने चॉपर के लिए आग्रह किया और रैनगलू हेलीपैड से उड़ान भर कर जंजैहली के खनुखली के हेलीपैड पर उतरे। इसके बाद उन्होंने गांव–गांव जाकर आपदा प्रभावित लोगों से मिले और राहत कार्यों का जायजा लिया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए। वह जंजैहली से लगभग 20 किलोमीटर पैदल चलकर सनवारा , रियाड़ा , जंजैहली , पौढ़ीधार , पांडव शिल्ला , जरोल , कुथाह , धार जोल पंचायत , तुंगाधार , भाटकीधार आदि क्षेत्रों में पहुंच कर आपदा प्रभावितों का हाल जाना,लोगों से मिले और हालात का जायजा लिया और उनका हौसला बढ़ाया। हवाई सर्वे करने के बाद जयराम ठाकुर ने भावुक होते हुए कहा कि यह बहुत दुखद पल है। 

सराज को सजाने में मैंने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी और आज त्रासदी ने उसे उजाड़ दिया।जिन खूबसूरत नजारों को देखकर नजर हटाने का मन नहीं होता था आज वही जगहें वीरान पड़ी है। उन्हें देखकर आंखें नम हो जाती हैं दिल बैठ सा जाता है। इन क्षेत्रों को फिर से बसना पहाड़ जैसी चुनौती है। उन्होंने लोगों से कहा कि हमारे हौसले पहाड़ जितने ऊंचे और इरादे चट्टान जैसे मजबूत हैं। हम हिम्मत नहीं हारेंगे, संघर्ष करेंगे और फिर से उठ खड़े होंगे। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हो मैं आपके साथ पूरी ताकत से खड़ा हूं। हमारा जीना मरना सब कुछ आप लोगों के साथ है। सराज को फिर से बसाने में हम अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। उन्होंने कहा कि कई-कई मंजिला मकान ध्वस्त हो गया। घर से बड़ी–बड़ी चट्टानें यहां से बहकर चली गई लेकिन पांडव शिला ज्यों की त्यों हैं। इस इलाके में ज्यादातर जगह जीवन की हानि नहीं हुई लेकिन  पांडव शिला में तीन लोगों की दुखद मृत्यु हुई है और अब तक एक ही शव खोजा जा सका है। आज जिला प्रशासन के आलाधिकारी भी मेरे साथ यहां पहली बार पहुंचे हैं। 

उन्होंने मंडी उपायुक्त से कहा कि सुरक्षित स्थान पर अस्थाई शेल्टर बने। क्योंकि लोग जो कपड़ा पहने थे उसी कपड़े के साथ ही अपना घर छोड़कर भागे हैं। मुख्यमंत्री स्वयं आएं और हालात का जायजा लें और ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करें। जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा के 8 दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी भी लोग सरकार की राह देख रहे हैं। 8 दिनों में सरकार का कोई प्रमुख नुमाइंदा यहां तक नहीं पहुंचा हैं। लोगों की शिकायत है कि सरकार ने उनकी सुध ही नहीं ली। इतनी बड़ी आपदा में सरकार को भी बड़ी तैयारी करनी पड़ेगी। अब तक जो चीज बहाल होनी चाहिए थी वह नहीं हुई हैं। जंजाली क्षेत्र में सारे रास्ते बंद पड़े हैं। बिजली पानी भी बहाल नहीं हुआ है। लोगों के पास पीने को साफ पानी नहीं है, बिजली की सुविधा भी अभी बहाल नहीं हुई है। राज्य सरकार की तरफ से जो काम किए जाने हैं वह और गति पड़े तो बेहतर है। जिस गति से काम हो रहा है वह नाकाफी है। ऐसे मामलों में लोगों को तत्काल राहत पहुंचानी होती है। 

उन्होंने राहत बचाव कार्य में लगे सेना, वायु सेना, आईटीबीपी , एनडीआरएफ , एसडीआरएफ, होमगार्ड , पुलिस के जवानों तथा लोक निर्माण, जल शक्ति, बिजली, पंचायती राज, समेत सभी विभागों के कर्मियों का आभार जताया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आपदा से राहत और बचाव कार्य को गति देने के साथ-साथ अब पुनर्वास की प्रभावी योजना भी बनाने की जरूरत है। क्योंकि कई जगह पूरा का पूरा गांव बर्बाद हो गया है। लोगों का घर ही नहीं उनकी जमीनें भी बह गई हैं। पूरे जीवन भर की कमाई एक पल में नष्ट हो गई है। कुछ बचा ही नहींहै। ऐसे में उनका पुनर्वास बहुत बड़ी चुनौती है जिससे पार पाना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात करके उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत करवाया और राहत बचाव कार्यों में तेजी लाने का आग्रह किया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज जिन्होंने फिर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात की और उन्हें वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। साथ ही त्वरित सहायता के लिए सेना,  वायु सेना, हेलीकॉप्टर, आईटीबीपी और एनडीआरएफ की टीमें भेजने के लिए आभार जताया।

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