चूड़धार यात्रा के दौरान सावधानी वरते श्रद्धालु, नौहराधार ट्रैक पर भटक भटक जाते है यात्री : कुंदन ठाकुर
चूड़धार यात्रा के दौरान नौहराधार मार्ग पर लगातार श्रद्धालुओं के रास्ता भटकने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई श्रद्धालु देर रात जंगलों में फंस गए तथा सहायता के लिए लगातार फोन कॉल करते रहे। मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या के बावजूद चूड़धार मंदिर फेसबुक पेज के सेवादारों ने घंटों फोन पर नेविगेशन गाइडेंस देकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित मंदिर तक पहुंचाया।
यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन 26 - 05 - 2026 :
चूड़धार यात्रा के दौरान नौहराधार मार्ग पर लगातार श्रद्धालुओं के रास्ता भटकने की घटनाएं सामने आ रही हैं। कई श्रद्धालु देर रात जंगलों में फंस गए तथा सहायता के लिए लगातार फोन कॉल करते रहे। मोबाइल नेटवर्क की गंभीर समस्या के बावजूद चूड़धार मंदिर फेसबुक पेज के सेवादारों ने घंटों फोन पर नेविगेशन गाइडेंस देकर श्रद्धालुओं को सुरक्षित मंदिर तक पहुंचाया।
चूड़ेश्वर सेवा समिति की प्रचार-प्रसार उपसमिति के अध्यक्ष कुंदन ठाकुर ने श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि समस्या मुख्य रूप से नौहराधार से चूड़धार जाने वाले पैदल ट्रैक पर सामने आ रही है। उन्होंने जानकारी दी कि नौहराधार से लगभग 7 किलोमीटर तक सड़क मार्ग उपलब्ध है जहां तक वाहन पहुंच सकते हैं, जबकि वहां से आगे चूड़धार मंदिर तक लगभग 11 किलोमीटर का लगभग 5 से 6 घंटे का पैदल सफर तय करना पड़ता है। श्रद्धालु सुबह जल्दी यात्रा आरंभ करें और हर हाल में सूर्यास्त से पहले मंदिर पहुंचने का प्रयास करें।
समिति ने श्रद्धालुओं से अनुरोध किया है कि रास्ते में अनावश्यक रूप से अधिक देर तक ढाबों पर न रुकें तथा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी में अत्यधिक समय व्यर्थ न करें। ढाबा संचालकों से भी तीर्थ की गरिमा बनाए रखने तथा श्रद्धालुओं को सही जानकारी देने की अपील की गई है। समिति ने बताया कि चूड़धार मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क लंगर प्रसाद एवं रात्रि विश्राम की व्यवस्था 15 मई से चुड़ेश्वर सेवा समिति चूड़धार द्वारा शुरू की जा चुकी है। वैकल्पिक मार्ग के रूप में शिमला जिला के चौपाल उपमंडल अंतर्गत सरेन (बिजट महाराज मंदिर) के समीप पुलबाहल सड़क मार्ग स्थित “मण्डाह लाणि” से है। यहां से चूड़धार मंदिर की दूरी लगभग 7 किलोमीटर है तथा श्रद्धालु सामान्यतः 3 से 4 घंटों में मंदिर पहुंच जाते हैं।
समिति ने श्रद्धालुओं से मौसम, स्वास्थ्य एवं समय को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारीपूर्वक यात्रा करने की अपील की है। यदि परिस्थितियां अनुकूल न हों तो जोखिम उठाने के बजाय सड़क मार्ग से ही शिरगुल महाराज को प्रणाम कर वापस लौटना भी उतना ही पुण्य का कार्य बताया गया है। श्रद्धालुओं से विनम्र अनुरोध किया गया है कि चूड़धार शिरगुल महाराज की आस्था का केंद्र है,इसलिए तीर्थ की गरिमा को ध्यान में रखते हुए सफाई और स्थान की पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाए। यह स्थान आस्था से जुड़ा धार्मिक स्थल है ना कि कोई आम पर्यटन स्थल।
What's Your Reaction?



