सरकारी कर्मचारियों को औपचारिक, साफ-सुथरे और सादे रंगों के कपड़े पहनना अनिवार्य,निर्देश जारी
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अपने कर्मचारियों के पहनावे और सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश में मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों और सरकारी संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 18-03-2026
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने अपने कर्मचारियों के पहनावे और सोशल मीडिया व्यवहार को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश में मुख्य सचिव कार्यालय ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों और सरकारी संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।
जारी आदेश के अनुसार सरकार ने 2017 में जारी दिशानिर्देशों को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारियों को कार्यालय में औपचारिक, साफ-सुथरे और सादे रंगों के कपड़े पहनना अनिवार्य होगा।
कोर्ट में पेशी या दफ्तर में उपस्थिति के दौरान कैजुअल या पार्टी वियर पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों का पहनावा उनके पेशेवर व्यवहार और अनुशासन को दर्शाता है।
सरकार ने इस आदेश में पांच प्रमुख बिंदुओं पर विशेष जोर दिया है। पहला, पुरुष कर्मचारियों को शर्ट-पैंट, ट्राउजर, कॉलर वाली शर्ट और जूते या सैंडल पहनना अनिवार्य होगा, जबकि महिला कर्मचारियों को साड़ी, सलवार-सूट, चूड़ीदार-कुर्ता या औपचारिक ड्रेस पहननी होगी। दूसरा, कार्यालय में जींस और टी-शर्ट पहनने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है।
तीसरा, सभी कर्मचारियों को अपने व्यक्तिगत स्वच्छता और साज-सज्जा पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कार्यालय का वातावरण पेशेवर बना रहे। चौथा, कर्मचारियों को सोशल मीडिया पर सरकार की नीतियों, योजनाओं या राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर व्यक्तिगत राय व्यक्त करने से बचने को कहा गया है।
पांचवां, बिना अनुमति किसी भी सरकारी दस्तावेज या सूचना को सार्वजनिक करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सरकार ने अपने आदेश में केंद्र सरकार के आचरण नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि सरकारी कर्मचारी कोई भी ऐसा कार्य न करें जो उनके पद की गरिमा के विपरीत हो।
नियमों के अनुसार कर्मचारी सार्वजनिक मंच या सोशल मीडिया पर ऐसी टिप्पणी नहीं कर सकते जिससे सरकार की नीतियों की आलोचना हो या सरकार की छवि पर असर पड़े। साथ ही, यदि कोई कर्मचारी किसी पुस्तक या मीडिया में अपनी राय देता है, तो उसे स्पष्ट करना होगा कि यह उसकी व्यक्तिगत राय है, न कि सरकार की।
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