केंद्रीय मंत्रिमंडल ने  18,509 करोड़ रुपए की रेलवे की तीन नई परियोजनाओं को प्रदान की मंजूरी 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुल 18,509 करोड़ रुपए की रेलवे की तीन नई परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुंबई-हावड़ा लाइन पर कसारा-मनमाड़ के बीच, दिल्ली से अंबाला के बीच और बेल्लारी से होसपेट के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति

Feb 14, 2026 - 15:48
 0  5
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने  18,509 करोड़ रुपए की रेलवे की तीन नई परियोजनाओं को प्रदान की मंजूरी 
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media
Paras School Sadak Suraksha Doon Valley Deeserve Media

न्यूज़ एजेंसी - नई दिल्ली   14-02-2026

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुल 18,509 करोड़ रुपए की रेलवे की तीन नई परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुंबई-हावड़ा लाइन पर कसारा-मनमाड़ के बीच, दिल्ली से अंबाला के बीच और बेल्लारी से होसपेट के बीच तीसरी और चौथी लाइन के निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। 

सूचना एवं प्रसारण और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि 131 किमी के कसारा-मनमाड़ सेक्शन पर तीसरी और चौथी का काम 10,154 करोड़ रुपए की लागत से पांच साल में पूरा किया जाएगा। यह काफी चुनौतीपूर्ण परियोजना है। 

इसमें 28 किमी की पांच सुरंगों का निर्माण किया जायेगा जिसमें सबसे लंबी सुरंग 24 किलोमीटर की होगी। इस सेक्शन में तीन महत्वपूर्ण पुल और 16 बड़े पुल बनाए जाएंगे। काम पूरा होने के बाद कसारा और इगतपुरी सेक्शन पर ट्रेन में चढ़ाई के लिए अतिरक्त इंजन लगाने की जरूरत समाप्त हो जायेगी।

इससे हर साल माल ढुलाई 4.61 करोड़ टन बढ़ जाएगी। सालाना कार्बन डाई-ऑक्साइड उत्सर्जन 54 करोड़ टन कम होगा, लॉजिस्टिक्स लागत में 1,207 करोड़ रुपए की बचत होगी और 89 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजन होगा। 

दूसरी परियोजना दिल्ली-जम्मू मार्ग पर दिल्ली और अंबाला के बीच 194 किमी के सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन बनाने की है। इसे 5,983 करोड़ रुपये की लागत से चार साल में पूरा किया जायेगा। इस सेक्शन में एक महत्वपूर्ण और 28 बड़े पुल बनेंगे।

इस परियोजना में 34 बड़े पुलों के निर्माण होंगे। इससे हर साल 14 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाई-उत्सर्जन कम होगा और लॉजिस्टिक्स लागत में 323 करोड़ रुपए की बचत होगी। परियोजना से 44 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजन होगा।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow