केवल बजट घोषणा और प्रशासनिक आदेश नहीं ले सकते कानून का स्थान , अफसरों का वेतन रोकने पर बिफरे आईएएस 

हिमाचल प्रदेश ऑल इंडिया सर्विसेज एसोसिएशन ने राज्य बजट 2026-27 में अधिकारियों के वेतन को स्थगित करने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में एसोसिएशन ने राज्य सरकार को एक अभ्यावेदन सौंपते हुए कहा कि ऐसा कोई भी कदम असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ होगा। एसोसिएशन ने अपने अभ्यावेदन में स्पष्ट किया कि एक बार वेतन अर्जित हो जाने के बाद वह कर्मचारी का अधिकार बन जाता है, जिसे बिना कानूनी प्रक्रिया के रोका या स्थगित नहीं किया जा सकता

Apr 2, 2026 - 19:13
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केवल बजट घोषणा और प्रशासनिक आदेश नहीं ले सकते कानून का स्थान , अफसरों का वेतन रोकने पर बिफरे आईएएस 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  02-04-2026

हिमाचल प्रदेश ऑल इंडिया सर्विसेज एसोसिएशन ने राज्य बजट 2026-27 में अधिकारियों के वेतन को स्थगित करने के प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में एसोसिएशन ने राज्य सरकार को एक अभ्यावेदन सौंपते हुए कहा कि ऐसा कोई भी कदम असंवैधानिक और नियमों के खिलाफ होगा। एसोसिएशन ने अपने अभ्यावेदन में स्पष्ट किया कि एक बार वेतन अर्जित हो जाने के बाद वह कर्मचारी का अधिकार बन जाता है, जिसे बिना कानूनी प्रक्रिया के रोका या स्थगित नहीं किया जा सकता। 
केवल बजट घोषणा या प्रशासनिक आदेश कानून का स्थान नहीं ले सकते। उन्होंने यह भी कहा कि ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारियों की सेवा शर्तें केंद्र सरकार के अधीन होती हैं और इन्हें ऑल इंडिया सर्विसेज अधिनियम 1951 तथा संबंधित वेतन नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा एकतरफा फैसला लेना उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर होगा। एसोसिएशन ने यह भी तर्क दिया कि वेतन में कटौती या स्थगन का प्रावधान केवल संविधान के अनुच्छेद 360 (वित्तीय आपातकाल) के तहत ही संभव है, जिसे लागू करने का अधिकार केवल राष्ट्रपति के पास है। 
इसके अलावा उन्होंने कहा कि वित्तीय संकट का हवाला देकर कर्मचारियों के वैध भुगतान को टालना उचित नहीं है और इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय भी कई बार स्पष्ट दिशा-निर्देश दे चुका है। अंत में एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर इसे वापस लेने की मांग की है। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे सभी वैध और संवैधानिक वित्तीय उपायों में सरकार का सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

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