विकास और जनसुविधाओं में शून्य, कर्ज लेने में सबसे आगे है सुक्खू सरकार : जयराम ठाकुर
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की सुक्खू सरकार विकास और जनसुविधाओं के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है, लेकिन कर्ज लेने के मामले में नए रिकॉर्ड बना रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने पांच वर्षों तक कर्ज के नाम पर शोर मचाकर प्रदेश की जनता को गुमराह करते रहे, लेकिन सत्ता में आते ही उसी कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने कर्ज को अपना प्रमुख शासन मॉडल बना लिया है।
यंगवार्ता न्यूज सुन्दरनगर 4 जुलाई, 2026 :
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की सुक्खू सरकार विकास और जनसुविधाओं के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है, लेकिन कर्ज लेने के मामले में नए रिकॉर्ड बना रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने पांच वर्षों तक कर्ज के नाम पर शोर मचाकर प्रदेश की जनता को गुमराह करते रहे, लेकिन सत्ता में आते ही उसी कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने कर्ज को अपना प्रमुख शासन मॉडल बना लिया है। आज प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने वाला है और हर महीने की शुरुआत भारी-भरकम कर्ज लेकर की जा रही है। इसके बावजूद प्रदेश में विकास कार्य ठप हैं, नई परियोजनाएं नजर नहीं आ रही हैं और जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। सिर्फ सुक्खू सरकार ने अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल के उतना कर्ज अकेले ले लिया है जितना कि अब तक की सरकारों ने नहीं लिया। अपना कार्यकाल पूरा करते-करते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कर्ज लेने के सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हिमाचल प्रदेश को सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, आपदा राहत और अन्य विकास योजनाओं के लिए लगातार उदारतापूर्वक सहयोग दे रही है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं और वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए बार-बार केंद्र पर निराधार आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि लगातार लिया जा रहा हजारों करोड़ रुपये का कर्ज आखिर किस विकास कार्य पर खर्च हो रहा है। क्योंकि यह सरकार तो सिर्फ तालाबंदी की सरकार बनकर रह गईहै। खोज खोज कर पूर्व सरकार द्वारा खोले गए संस्थान बंद करना, पूर्व सरकार की योजनाओं को बदनाम करके उनकी वित्तीय मदद रोकना, लोगों को नौकरियां से निकलना, तरह-तरह की शुल्क लगाना ही सरकार का प्रमुख शगल है। यदि कर्ज बढ़ रहा है, लेकिन न विकास दिखाई दे रहा है और न ही जनता को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, तो यह सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जिसका जवाब सरकार को देना होगा।
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सुन्दरनगर: पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की सुक्खू सरकार विकास और जनसुविधाओं के मामले में पूरी तरह विफल साबित हुई है, लेकिन कर्ज लेने के मामले में नए रिकॉर्ड बना रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने पांच वर्षों तक कर्ज के नाम पर शोर मचाकर प्रदेश की जनता को गुमराह करते रहे, लेकिन सत्ता में आते ही उसी कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने कर्ज को अपना प्रमुख शासन मॉडल बना लिया है। आज प्रदेश पर कर्ज का बोझ लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने वाला है और हर महीने की शुरुआत भारी-भरकम कर्ज लेकर की जा रही है। इसके बावजूद प्रदेश में विकास कार्य ठप हैं, नई परियोजनाएं नजर नहीं आ रही हैं और जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। सिर्फ सुक्खू सरकार ने अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल के उतना कर्ज अकेले ले लिया है जितना कि अब तक की सरकारों ने नहीं लिया। अपना कार्यकाल पूरा करते-करते मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू कर्ज लेने के सारे रिकॉर्ड तोड़ देंगे।
जयराम ठाकुर ने कहा कि केंद्र की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हिमाचल प्रदेश को सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, आपदा राहत और अन्य विकास योजनाओं के लिए लगातार उदारतापूर्वक सहयोग दे रही है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं और वित्तीय कुप्रबंधन को छिपाने के लिए बार-बार केंद्र पर निराधार आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि लगातार लिया जा रहा हजारों करोड़ रुपये का कर्ज आखिर किस विकास कार्य पर खर्च हो रहा है। क्योंकि यह सरकार तो सिर्फ तालाबंदी की सरकार बनकर रह गईहै। खोज खोज कर पूर्व सरकार द्वारा खोले गए संस्थान बंद करना, पूर्व सरकार की योजनाओं को बदनाम करके उनकी वित्तीय मदद रोकना, लोगों को नौकरियां से निकलना, तरह-तरह की शुल्क लगाना ही सरकार का प्रमुख शगल है। यदि कर्ज बढ़ रहा है, लेकिन न विकास दिखाई दे रहा है और न ही जनता को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं, तो यह सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। जिसका जवाब सरकार को देना होगा।
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