धामी में जमकर बरसे पत्थर, खून से हुआ मां भद्रकाली का तिलक,जमोगी और कटेड़ू टोलियों के बीच जमकर बरसे पत्थर

राजधानी से सटे शिमला ग्रामीण के हलोग धामी में दिवाली के दूसरे दिन होने वाले पत्थर के खेल की पौराणिक देव परंपरा के पत्थर के खेल का आयोजन किया गया। धामी में खेल का चौरा नामक स्थान पर घाटी के दोनों ओर से जमोगी और कटेड़ू टोलियों के बीच जमकर पत्थरों की बरसात हुई

Oct 21, 2025 - 19:10
Oct 21, 2025 - 20:17
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धामी में जमकर बरसे पत्थर, खून से हुआ मां भद्रकाली का तिलक,जमोगी और कटेड़ू टोलियों के बीच जमकर बरसे पत्थर
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला     21-10-2025

राजधानी से सटे शिमला ग्रामीण के हलोग धामी में दिवाली के दूसरे दिन होने वाले पत्थर के खेल की पौराणिक देव परंपरा के पत्थर के खेल का आयोजन किया गया। धामी में खेल का चौरा नामक स्थान पर घाटी के दोनों ओर से जमोगी और कटेड़ू टोलियों के बीच जमकर पत्थरों की बरसात हुई। इस बार करीब पौना घंटा तक लगातार दोनों टोलियों की ओर से पत्थर मारे गए। 

चार बजे से लेकर 4:40 तक हुए इस खेल में कटेड़ू टोली के सुभाष के हाथ में पत्थर लगा। उसके खून से परंपरा के अनुसार खेल का चौरा में स्थित मां भद्रकाली के मंदिर में तिलक कर पत्थर का खेल समपन्न हुआ। पत्थर लगने पर मौजूद सैकड़ों लोग ढोल नगाड़ों की थाप पर एक साथ थिरकते रहे।

राजधानी शिमला से 35 किलोमीटर दूर धामी के खेल का चौरा में मंगलवार को पारंपरिक पत्थर का खेल करीब चार बजे शुरू हुआ । दरबार से करीब तीन बजे राज परिवार के उत्तराधिकारी जगदीप सिंह, पुजारी तनुज और राकेश शर्मा के पूजा अर्चना और पूजा के फूल लेकर ढोल नगाड़ों के साथ शोभा यात्रा खेल का चौरा के लिए निकली गई। 

शोभा यात्रा में पुष्पेंद्र सिंह, दुर्गेश सिंह, रणजीत सिंह, चेतराम, लेख राम, बाबु राम, प्रकाश, हेत राम , प्रकाश नील सहित अन्य लोग 3:40 बजे सती का शारड़ा स्मारक पर पहुंचे। मत्था टेकने के बाद झंडा लहराने के आयोजकों के इशारे के साथ ही घाटी के एक ओर एकत्र जमोगी, और दूसरी ओर कटेड़ू टोली के लोगों न पत्थर बरसाना शुरू कर दिया। 

पत्थर के इस खेल के दौराना बीच से गुजर रही सड़क से वाहनों की आवाजाही और, पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी गई थी। करीब 4:40 पर कटेड़ू टोली की ओर से सुभाष के हाथ में पत्थर लगने पर खेल को आयोजकों ने रोकने का इशारा किया। समारक पर मत्था टेका गया, इसके बाद पहाड़ी पर बने भद्रकाली के मंदिर में तिलक कर परंपरा को पूरा किया गया। 

इसके बाद सुभाष को प्राथमिक उपचार दिया गया। इस रोमांचक और अनौखी परंपरा को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोग जुटे थे। जगदीप सिंह ने माता के मंदिर में पूजा अर्चना कर क्षेत्र की रक्षा और लोगों की सुख समृद्धि के लिए पूजा अर्चना की। 

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