दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रदेश सरकार की सराहनीय पहल , प्रारंभिक से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति का प्रावधान

राज्य सरकार द्वारा दिव्यांग छात्र-छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना एक दूरदर्शी और संवेदनशील कदम सिद्ध हो रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सशक्त बनाना है। योजना के अंतर्गत ऐसे दिव्यांग छात्र-छात्राएं जो सरकार द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत हैं

Mar 16, 2026 - 18:26
Mar 16, 2026 - 18:50
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दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रदेश सरकार की सराहनीय पहल , प्रारंभिक से उच्च शिक्षा तक छात्रवृत्ति का प्रावधान

यंगवार्ता न्यूज़ - मंडी  16-03-2026

राज्य सरकार द्वारा दिव्यांग छात्र-छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना एक दूरदर्शी और संवेदनशील कदम सिद्ध हो रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सशक्त बनाना है। योजना के अंतर्गत ऐसे दिव्यांग छात्र-छात्राएं जो सरकार द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययनरत हैं और जिनकी दिव्यांगता चिकित्सा बोर्ड द्वारा 40 प्रतिशत या उससे अधिक प्रमाणित की गई है, उन्हें बिना किसी आय सीमा के छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। पहली से पाँचवीं कक्षा तक के दिव्यांग छात्र-छात्राओं को 625 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। 
वहीं छठी से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को 750 रुपये प्रतिमाह, नौवीं और दसवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं को 950 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। पहली से दसवीं कक्षा तक के जो दिव्यांग विद्यार्थी छात्रावास में रह रहे हैं, उन्हें 1,875 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति भी दी जाती है। इसी तरह जमा एक, जमा दो तथा पोस्ट मैट्रिक कोर्स करने वाले विद्यार्थियों को 1,250 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जबकि छात्रावास में रहने के लिए 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। कक्षा जमा दो के बाद डिप्लोमा कोर्स, स्नातक, जेबीटी या आईटीआई करने वाले लाभार्थियों को 1,875 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जाती है। वहीं छात्रावास में रहने वालों के लिए यह राशि 3,750 रुपये प्रतिमाह निर्धारित है। इसके अतिरिक्त एलएलबी, बीएड, एमए, एमएससी, एमएड आदि कोर्स करने वाले दिव्यांग विद्यार्थियों को 2,250 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जबकि छात्रावास में रहने वालों को 3,750 रुपये प्रतिमाह दिए जाते हैं। 
अन्य व्यावसायिक कोर्स जैसे बीई, बीटेक, एमबीबीएस आदि के लिए 3,750 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है तथा छात्रावास में रह रहे विद्यार्थियों के लिए यह राशि 5,000 रुपये प्रतिमाह निर्धारित है। योजना का लाभ लेने के लिए पात्र दिव्यांग छात्र/छात्रा का निर्धारित प्रार्थना पत्र शिक्षण संस्थान के प्रधानाचार्य/मुख्याध्यापक द्वारा, संबंधित कक्षा में प्रवेश की तिथि सहित, सत्यापित होना अनिवार्य है। योजना का लाभ लेने के लिए चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जिसमें दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक दर्शाई गई हो, संलग्न करना आवश्यक है। साथ ही हिमाचली प्रमाण पत्र, आधार कार्ड तथा बैंक पासबुक की छायाप्रति संलग्न करना अनिवार्य है। मनोज कुमार निवासी गांव योह तहसील सरकाघाट का कहना है कि उनकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी रितिका दसवीं कक्षा में पढ़ती है और 60 प्रतिशत दिव्यांग है और छात्रवृत्ति का लाभ मिला है। उन्होंने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का धन्यवाद व्यक्त किया जिन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसी योजनाएं चलाई हैं। गांव खरोह तहसील सरकाघाट की रहने वाली ममता बन्याल ने बताया कि उनकी बेटी रिवांशु राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पपलोग में बारहवीं कक्षा में पढ़ती है और 80 प्रतिशत श्रवण बाधित है। योजना के तहत रिवांशु को छात्रवृत्ति मिल रही है। 
उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के लिए सरकार ने यह बहुत अच्छा कदम उठाया है। गांव खरोह तहसील सरकाघाट की रजनी कुमारी ने बताया कि उनकी बेटी कनिका शर्मा श्रवण बाधित और 70 प्रतिशत दिव्यांग है। उन्हें प्रदेश सरकार की इस दिव्यांग छात्रवृत्ति योजना के बारे में पता चला तो उन्होंने इसके लिए आवेदन किया। अब उनकी बेटी को छात्रवृत्ति अब मिल रही है। मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा कि यह प्रदेश सरकार की एक बहुत अच्छी योजना है। राज्य सरकार की यह पहल समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाती है। यह योजना दिव्यांग विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ने, उन्हें समान अवसर देने और एक समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में एक मजबूत कदम है। निश्चित ही, ऐसे प्रयास आने वाले समय में राज्य को शिक्षित, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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