भारतीय ज्ञान परम्परा को बढ़ाने में केंद्रीय विश्वविद्यालय का प्रयास सराहनीय ,  सीयू के स्थापना दिवस समारोह में बोले राज्यपाल

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत में परिवर्तन लाएगी। इस व्यापक नीति को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता है किन्तु इसे क्रमबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। वे मंगलवार को स्थानीय कॉलेज के सभागार में केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से मनाए जा रहे स्थापना समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए बोल रहे थे

Jan 21, 2025 - 17:39
Jan 21, 2025 - 17:59
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भारतीय ज्ञान परम्परा को बढ़ाने में केंद्रीय विश्वविद्यालय का प्रयास सराहनीय ,  सीयू के स्थापना दिवस समारोह में बोले राज्यपाल
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यंगवार्ता न्यूज़ - धर्मशाला  21-01-2025

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि नई शिक्षा नीति भारत में परिवर्तन लाएगी। इस व्यापक नीति को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता है किन्तु इसे क्रमबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। वे मंगलवार को स्थानीय कॉलेज के सभागार में केंद्रीय विश्वविद्यालय की ओर से मनाए जा रहे स्थापना समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा के महत्व को बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में इसको बढ़ाने के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा है ये विश्वविद्यालय परिवार के लिए गर्व की बात है। गत वर्षों में विश्वविद्यालय ने जिन ऊंचाइयों को छुआ है, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने विकसित भारत 2047 के लिए विश्वविद्यालय को शोध पूर्ण , गुणवत्ता युक्त शिक्षा केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाने के साथ ही वैश्विक आवश्यकताओं के अनुरूप अपने को तैयार करने पर जोर दिया। 
कार्यक्रम का आगाज दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने मुख्य अतिथि का अभिवादन किया। उन्होंने इस मौके पर मौजूद विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए विगत वर्षों में विश्वविद्यालय की ओर से हासिल की गई गतिविधियों का ब्योरा सभी के समक्ष रखा। उन्होंने मुख्य अतिथि राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल के साथ प्रो. नीलिमा गुप्ता कुलपति, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर, प्रो. आर.पी. तिवारी कुलपति, पंजाब केन्द्रीय विश्वविद्यालय, बठिंडा, प्रो. नागेश ठाकुर कार्यकारिणी सदस्य (NAAC), डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सोलन के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल को हिमाचली टोपी एवं शॉल पहनाकर सम्मानित किया। कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने विश्वविद्यालय परिवार को बधाई देते हुए कहा कि हमें आत्मनिरीक्षण करने होगा कि आज से 14 साल पहले हमने जो विश्वविद्यालय के लिए लक्ष्य तय किए थे, उनको हासिल करने में हम कितने समक्ष साबित हुए हैं। उन्होंने हर्ष जताते हुए कहा कि आज यह विश्वविद्यालय अपने पैरों पर खड़ा हो चुका है। 
विश्वविद्यालय का अपना कैंपस नहीं था, अब हम आगामी अकादमिक सत्र देहरा स्थित अपने कैंपस में शुरू करने जा रहे हैं। कैंपस लगभग तैयार हो चुका है। हम लगातार शोध के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शिक्षण संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए हैं। हमें नैक की ग्रेडिंग में ए प्लस मिला है। यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। हम इंडियाना यूनिवर्सिटी के साथ ज्वाइंट डिग्री प्रोग्राम शुरू करने जा रहे हैं। विश्वविद्यालय का ग्राफ लगातार ऊपर उठ रहा है। विश्वविद्यालय ने लगभग 25 पेटेंट प्राप्त किए हैं। सात से आठ करोड़ के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय परिवार बधाई का पात्र है। वहीं इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो सुमन शर्मा, डीन अकादमिक प्रो प्रदीप कुमार, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. सुनील कुमार, शोध निदेशक प्रो प्रदीप नायर, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य अन्य अधिकारी एवं कर्मचारियों समेत विश्वविद्यालय के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। 
शैक्षणिक संकाय सदस्यों में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार प्रो संजीत , प्रो. ओ.एस.के.एस शास्त्री, प्रो. बी.सी चौहान, डा. राकेश और डा. मनप्रीत अरोड़ा को सम्मानित किया गया। वहीं गैर शिक्षकेतर कर्मचारियों में अनुपम ठाकुर, राहुल, आपूर्ति अवस्थी, रोहित धीमान, हिंदभूषण कुटलैहड़िया और अजय कुमार को पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के कैलेंडर 2025 का विमोचन, विश्वविद्यालय के न्यूज लेटर का विमोचन, विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित पुस्तकों / समाचार-पत्र का विमोचन, विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर, हिंदी पखवाड़ा 2024 के विजेताओं को प्रमाण-पत्र वितरण, खेल स्पर्धाओं में विश्वविद्यालय की ओर से भाग लेने वाले विद्यार्थियों का सम्मान और योग स्पर्धा में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया।

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