कांगड़ा एयरपोर्ट विस्थापन का तरीका हिमाचल के इतिहास में बेस्ट मॉडल बनकर उभरा 

कांगड़ा एयरपोर्ट विस्थापन का यह तरीका हिमाचल के इतिहास में बेस्ट मॉडल बनकर उभरा है। अतीत में पौंग और भाखड़ा बांध के विस्थापितों को मिलने वाली परेशानियों और दशकों पुराने लंबित राहत मामलों के विपरीत, यहां प्रभावितों को बिना किसी पीड़ा या आंदोलन के उचित मुआवजा और सुविधाएं दी जा रही

Jan 18, 2026 - 16:02
 0  6
कांगड़ा एयरपोर्ट विस्थापन का तरीका हिमाचल के इतिहास में बेस्ट मॉडल बनकर उभरा 

यंगवार्ता न्यूज़ - कांगड़ा    18-01-2026

कांगड़ा एयरपोर्ट विस्थापन का यह तरीका हिमाचल के इतिहास में बेस्ट मॉडल बनकर उभरा है। अतीत में पौंग और भाखड़ा बांध के विस्थापितों को मिलने वाली परेशानियों और दशकों पुराने लंबित राहत मामलों के विपरीत, यहां प्रभावितों को बिना किसी पीड़ा या आंदोलन के उचित मुआवजा और सुविधाएं दी जा रही हैं। 

आर एंड आर मॉडल भी पूरे देश भर के मॉडल से अलग है। इसमें जमीन व घर से पूरी तरह विस्थावित होने और दूसरे केवल भूमि देने वाले प्रभावितों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। 

इतना ही नहीं, कांगड़ा माडल के तहत उजडऩे वालों को प्रदेश सरकार ने उजडऩे से पहले वसाने की भी व्यवस्था करने के लिए बाकायदा हिमुडा के माध्यम से प्लाट व घर बनाने का प्रावधान किया है। इसके अलावा जमीन, स्ट्रक्चर सहित पेड़ पौधों से लेकर सभी तरह की वेल्यू के हिसाब से लोगों को राहत दी जा रही है।

इससे पूर्व संबंधित हिस्सेदारों के बीच भी कई दौर की वार्ता के बाद ही इस माडल को जमीन पर उतारा जा रहा है। कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार के लिए आवश्यक कुल भूमि का करीब 70 प्रतिशत हिस्से का मुआबजा सरकार ने प्रभावितों को दे दिया है। जिसमें अधिकतर मामलों में लोगों ने पूर्व योजना के आधार पर सहर्ष स्वीकार भी किया है। 

प्रशासन ने अब तक प्रभावित परिवारों को मुआवजे के रूप में 1152 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि वितरित कर दी है, जो राज्य के किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में अब तक की सबसे सुव्यवस्थित वितरण प्रक्रिया मानी जा रही है। इस महत्वाकांक्षी विस्तार परियोजना के लिए कुल 122.5 हेक्टेयर निजी और 26 हेक्टेयर सरकारी भूमि का चयन किया है, जिसमें 6.70 हेक्टेयर वन भूमि भी शामिल है। 

गौर हो कि कुल आवश्यक भूमि के लगभग 77.77 प्रतिशत हिस्से के लिए मुआवजे (अवार्ड) की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 4,064 करोड़ रुपए आंकी गई है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा, यानी करीब 3,000 से 3,500 करोड़ रुपए, केवल भूमि अधिग्रहण और प्रभावितों के विस्थापन पर खर्च किया जा रहा है। जिससे लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सके।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow