सीपीआई(एम) ने संजय गुप्ता, IAS को नियमित मुख्य सचिव बनाए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार द्वारा संजय गुप्ता, IAS को नियमित मुख्य सचिव बनाए जाने के निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए इसे भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाला, संस्थागत शुचिता पर हमला तथा प्रशासनिक नैतिकता को समाप्त करने वाला निर्णय बताया है।

May 26, 2026 - 17:25
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सीपीआई(एम) ने  संजय गुप्ता, IAS को नियमित मुख्य सचिव बनाए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया

शिमला 26 मई, 2026 :

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश सरकार द्वारा संजय गुप्ता, IAS को नियमित मुख्य सचिव बनाए जाने के निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए इसे भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाला, संस्थागत शुचिता पर हमला तथा प्रशासनिक नैतिकता को समाप्त करने वाला निर्णय बताया है। पार्टी ने कहा कि यह फैसला प्रदेश सरकार के तथाकथित “जीरो टॉलरेंस ऑन करप्शन” के दावों की वास्तविकता को पूरी तरह उजागर करता है।

सीपीआई(एम) राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि जिस अधिकारी के विरुद्ध गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप, लंबित FIRs, Criminal References तथा सतर्कता संबंधी शिकायतें मौजूद हों, जिसके मामलों पर स्वयं माननीय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय “Institutional Integrity” जैसे गंभीर प्रश्न उठाते हुए नोटिस जारी कर चुका हो, ऐसे अधिकारी को प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर नियमित नियुक्ति देना लोकतांत्रिक संस्थाओं, प्रशासनिक पारदर्शिता तथा जनविश्वास पर सीधा आघात है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने यह नियुक्ति केवल इसलिए की है ताकि संबंधित अधिकारी को सेवा विस्तार देने का रास्ता साफ किया जा सके, क्योंकि सेवा विस्तार नियमित पद पर ही संभव होता है, अतिरिक्त प्रभार पर नहीं। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश सरकार किसी भी कीमत पर उक्त अधिकारी को संरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

संजय चौहान ने कहा कि सीपीआई(एम) लगातार उक्त अधिकारी की कार्यप्रणाली, निर्णयों तथा भ्रष्टाचार संबंधी मामलों को जनता के बीच उठाती रही है। चेस्टर हिल भूमि प्रकरण, HPPTCL में करोड़ों रुपये की खरीद एवं ट्रांसमिशन लाइन आवंटन से जुड़े गंभीर आरोपों सहित अनेक मामलों में विस्तृत भ्रष्टाचार शिकायतें संबंधित एजेंसियों को भेजी जा चुकी हैं। इसके बावजूद सरकार द्वारा उन्हें नियमित मुख्य सचिव बनाना यह साबित करता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में जांच एजेंसी द्वारा उक्त अधिकारी की गाड़ी से नकदी बरामद होने के बाद गिरफ्तारी एवं निलंबन जैसी गंभीर घटनाओं का संज्ञान अब माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी लिया जा चुका है। इसके बावजूद सरकार का यह निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, जनविरोधी तथा प्रशासनिक मूल्यों के खिलाफ है।

सीपीआई(एम) ने प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं जैसे गंभीर मुद्दों पर विपक्ष का मौन रहना अत्यंत चिंताजनक है और इससे जनता में यह संदेश जा रहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों पर सत्ता और विपक्ष के बीच अंदरूनी सहमति बनी हुई है।

संजय चौहान ने कहा कि सीपीआई(एम) इस निर्णय का पुरजोर विरोध करेगी तथा भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी, राजनीतिक एवं जनआंदोलन के स्तर पर संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उक्त अधिकारी के खिलाफ विस्तृत भ्रष्टाचार शिकायत तैयार की है तथा आने वाले समय में इस मुद्दे को जनता के बीच व्यापक रूप से उठाया जाएगा।

सीपीआई(एम) ने मांग की है कि श्री संजय गुप्ता को नियमित मुख्य सचिव बनाए जाने के कार्यालय आदेश दिनांक 26/05/2026 को तुरंत निरस्त किया जाए तथा सेवा विस्तार देने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए, उन्हें पद से हटाया जाए तथा उनके विरुद्ध लंबित मामलों में निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए।

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