क्या ! देश के नक्शे से मिट जाएगा हिमाचल , सुप्रीम कोर्ट ने किया आगाह जानिए 

कोर्ट ने कहा अगर इसी तरह हिमाचल प्रदेश में बेहताशा कंक्रीट के जंगल , सड़कों का चौड़ीकरण और जल विद्युत परियोजनाएं बनती रही तो देश के नक्शे से गायब हो जाएगा। देश के नशे से गायब हो जाएगा हिमाचल जी हां ! आपने सही सुना , लेकिन यह हम नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट कह रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश को चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह हिमाचल प्रदेश में कंक्रीट के जंगल बनते रहे , जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण होता रहा और सड़कों का चौड़ीकरण चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल प्रदेश देश के नशे से गायब हो जाएगा

Aug 2, 2025 - 19:24
Aug 2, 2025 - 19:50
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क्या ! देश के नक्शे से मिट जाएगा हिमाचल , सुप्रीम कोर्ट ने किया आगाह जानिए 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला   02-08-2025
कोर्ट ने कहा अगर इसी तरह हिमाचल प्रदेश में बेहताशा कंक्रीट के जंगल , सड़कों का चौड़ीकरण और जल विद्युत परियोजनाएं बनती रही तो देश के नक्शे से गायब हो जाएगा। देश के नशे से गायब हो जाएगा हिमाचल जी हां ! आपने सही सुना , लेकिन यह हम नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट कह रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश को चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह हिमाचल प्रदेश में कंक्रीट के जंगल बनते रहे , जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण होता रहा और सड़कों का चौड़ीकरण चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हिमाचल प्रदेश देश के नशे से गायब हो जाएगा। देश की शीर्ष अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में आ रही प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए आने वाले समय में स्थिति विकट हो सकती है। कोर्ट ने बताया कि देवभूमि हिमाचल बेहतर पर्यावरण के लिए जाना जाता था। आज हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण का संरक्षण ही सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 
शीर्ष अदालत ने बताया कि हिमाचल प्रदेश में सड़कों का निर्माण और बड़े-बड़े भवन तो बन रहे हैं , लेकिन जंगल दिन प्रतिदिन कम होते जा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने बताया कि यदि हिमाचल प्रदेश को बचाना है तो हमें पर्यावरण संरक्षण पर जोर देना होगा। देवभूमि हिमाचल में हरित क्षेत्र बढ़ाना पड़ेगा। इसके लिए न केवल संबंधित विभाग , बल्कि हिमाचल प्रदेश सरकार और प्रदेश की जनता को भी आगे आना पड़ेगा। कोर्ट ने कहा हिमाचल प्रदेश में जहां भी खाली स्थान मिले वहां पौधा रोपण करना होगा। गौर हो कि एक होटल कंपनी ने भवन निर्माण को लेकर याचिका लगाई थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने होटल की याचिका को खारिज करने के बाद अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए इस विषय पर संज्ञान लिया। पर्यावरण संरक्षण के विषय पर संज्ञान लेते हुए एक जनित याचिका शुरू की है जिसमें हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संकट पर ध्यान दिया जाएगा कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में दिन प्रतिदिन खराब स्थिति खराब होती जा रही है। 
अदालत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में यहां पर गंभीर पर्यावरण असंतुलन और प्राकृतिक आपदा लगातार बढ़ रही है। इन प्राकृतिक आपदाओं में जहां लोग बेमौत मारे जा रहे हैं , वहीं प्रतिवर्ष हजारों हेक्टेयर भूमि भूस्खलन की चपेट में आ रही है। यही नहीं प्राकृतिक आपदा में जहां लोगों के जीवन नष्ट हो रहे हैं , वहीं हजारों संपत्तियां भी बर्बाद हो रही है। कोर्ट ने साफ कहा कि इसके लिए केवल प्रकृति को दोष देना गलत है , बल्कि इसके असली जिम्मेदार तो आम जनमानस है। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि अत्यधिक निर्माण कार्य , सड़कों का चौड़ीकरण और जल विद्युत परियोजनाओं के साथ-साथ पेड़ों की कटाई को भी रोकना होगा। बताते हैं कि यदि हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के लिए कोई ठोस खत्म नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश को ना तो कोई नेशनल हाईवे मिलेगा और ना ही जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण होगा। 

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