खाकी का मानवीय चेहरा हटने से युवा मायूस, एएसआई सुरेश मेहता की वापसी की उठी मांग

अक्सर पुलिस और जनता के बीच के रिश्तों में एक दूरी और खौफ देखने को मिलता है, लेकिन सिरमौर जिला के मुख्यालय नाहन में एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। यहाँ की गुन्नूघाट चौकी में तैनात रहे एएसआई सुरेश मेहता के स्थानांतरण ने शहर में रहकर पढ़ाई और रोजगार कर रहे युवाओं को भावुक कर दिया है। शिलाई , पांवटा , रेणुका और नाहन विधानसभा क्षेत्रों के सैकड़ों युवाओं ने एक स्वर में मेहता को वापस गुन्नूघाट चौकी का प्रभार सौंपने की मांग उठाई है

Jan 25, 2026 - 20:08
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खाकी का मानवीय चेहरा हटने से युवा मायूस, एएसआई सुरेश मेहता की वापसी की उठी मांग
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  25-01-2026
अक्सर पुलिस और जनता के बीच के रिश्तों में एक दूरी और खौफ देखने को मिलता है, लेकिन सिरमौर जिला के मुख्यालय नाहन में एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। यहाँ की गुन्नूघाट चौकी में तैनात रहे एएसआई सुरेश मेहता के स्थानांतरण ने शहर में रहकर पढ़ाई और रोजगार कर रहे युवाओं को भावुक कर दिया है। शिलाई , पांवटा , रेणुका और नाहन विधानसभा क्षेत्रों के सैकड़ों युवाओं ने एक स्वर में मेहता को वापस गुन्नूघाट चौकी का प्रभार सौंपने की मांग उठाई है। नाहन शहर में वर्तमान में करीब एक हजार से अधिक विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश छात्र जिला के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखते हैं। युवाओं का कहना है कि एएसआई सुरेश मेहता ने केवल कानून व्यवस्था ही नहीं संभाली, बल्कि इन छात्रों के लिए एक स्थानीय अभिभावक की भूमिका भी निभाई।
 चाहे वह बाहरी क्षेत्रों से आए छात्रों की व्यक्तिगत समस्याएं हों या सामाजिक चुनौतियां, मेहता ने हमेशा संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के साथ उनका समाधान निकाला। विद्यार्थियों के अनुसार, उनका व्यवहार कभी भी एक कठोर पुलिस अधिकारी जैसा नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक जैसा रहा है। सिर्फ युवा ही नहीं , बल्कि नाहन के स्थानीय दुकानदार और बुजुर्ग भी मेहता के कार्यशैली के प्रशंसक रहे हैं। गुन्नूघाट जैसे व्यस्त बाजार क्षेत्र में दुकानदारों के साथ बेहतर तालमेल और बुजुर्गों के प्रति उनके सम्मानजनक व्यवहार ने उन्हें 'जनता का सिपाही' बना दिया है। युवाओं का तर्क है कि जब कोई अधिकारी जनता के साथ इतना गहरा समन्वय स्थापित कर लेता है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखना और भी आसान हो जाता है। ऐसे में उनका अचानक वहां से हटाया जाना शहर के सामाजिक ताने-बाने के लिए एक बड़ी कमी माना जा रहा है। इस मामले को लेकर युवाओं ने अब एक ठोस रणनीति तैयार की है। 
युवाओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने निर्णय लिया है कि वे जल्द ही प्रदेश के उद्योग मंत्री, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और स्थानीय विधायक से मुलाकात करेंगे। वे सरकार को अवगत कराएंगे कि जनता के बीच लोकप्रिय ऐसे अधिकारियों को उसी स्थान पर तैनात रखा जाना चाहिए जहां उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है। युवाओं ने पुलिस अधीक्षक सिरमौर निश्चित नेगी की कार्यप्रणाली पर भी भरोसा जताते हुए उनसे इस निर्णय पर पुनर्विचार करने का विशेष आग्रह किया है। सुरेश मेहता की पुनः तैनाती की मांग करने वालों में अरुण शर्मा , गौरव पुंडीर , लाल सिंह , रविंद्र, सचिन ठाकुर, शुभम शर्मा, साहिल राणा, निक्कू राणा, समीर तोमर, प्रथम, तरुण ठाकुर, राजेश शर्मा, मनोज धामटा, मनीष, नवीन धीमान, विनय शर्मा, अंकित, प्रकाश, विक्की और विशाल सहित भारी संख्या में युवा शामिल हैं। इन सभी का मानना है कि पुलिस विभाग को जनता की भावनाओं और जमीनी स्तर पर अधिकारी के प्रभाव को देखते हुए फैसला लेना चाहिए।

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