बीपीएल सूची के नाम काटना, गरीबों को योजनाओं से बाहर करने का संगठित षड्यंत्र : राकेश जमवाल 

भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में बीपीएल सूची के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा

Jan 4, 2026 - 15:42
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बीपीएल सूची के नाम काटना, गरीबों को योजनाओं से बाहर करने का संगठित षड्यंत्र : राकेश जमवाल 
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सुखू सरकार ने बीपीएल को ‘प्रशासनिक प्रक्रिया’ नहीं, लूट का औज़ार बना दिया 

यंगवार्ता न्यूज़ -  शिमला   04-01-2026

भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में बीपीएल सूची के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है, वह अब किसी भ्रम में रखने वाला विषय नहीं रह गया है। यह साफ तौर पर गरीबों को सरकारी योजनाओं से बाहर करने का सुनियोजित और संगठित षड्यंत्र है।

राकेश जमवाल ने कहा कि नए नियमों और कट-ऑफ का बहाना बनाकर, बिना पारदर्शिता, बिना पंचायतों की संस्तुति और बिना वास्तविक जमीनी सत्यापन के, जिलाधीशों के माध्यम से हजारों पात्र गरीब परिवारों के नाम बीपीएल सूची से हटाए जा रहे हैं। कई क्षेत्रों में जारी नई सूचियों में 80 से 90 प्रतिशत तक पुराने बीपीएल परिवारों का अचानक गायब हो जाना इस बात का प्रमाण है कि यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि योजनाबद्ध कटौती है।

मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि बीपीएल सूची से नाम कटते ही गरीब परिवारों से आवास,राशन,पेंशन,इलाज, छात्रवृत्ति जैसी जीवन से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं अपने आप छिन जाती हैं। कांग्रेस सरकार एक झटके में गरीबों के जीवन की पूरी सुरक्षा-ढाल तोड़ रही है।

राकेश जमवाल ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया से पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों को जानबूझकर बाहर रखा गया, क्योंकि प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड पंच जमीनी सच्चाई जानते हैं और गरीबों के हक में खड़े होते हैं। कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को दरकिनार कर अफसरशाही के जरिए बीपीएल तय करने का रास्ता चुना है।

उन्होंने कहा कि बीपीएल घपले की असली जड़ पंचायत चुनाव न करवाने की साजिश से जुड़ी है। सरकार तय समय पर पंचायत चुनाव इसलिए नहीं करवा रही ताकि निर्वाचित प्रतिनिधियों की अवधि समाप्त हो जाए और गांवों में अधिकारी बैठाकर बीपीएल चयन, योजनाओं और धनराशि के नाम पर मनमानी और बंदरबांट की जा सके। यही वजह है कि कांग्रेस सरकार के पास आयोजनों, प्रचार और दिखावे के लिए पैसा है, लेकिन पंचायत चुनाव और गरीबों की सही पहचान के लिए नहीं।

मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि यह कोई संयोग नहीं है कि एक तरफ बीपीएल सूची से नाम काटे जा रहे हैं और दूसरी तरफ मनरेगा जैसे रोजगार कार्यक्रम ठप पड़े हैं। गरीबों की पहचान भी छीनी जा रही है और आजीविका के साधन भी।राकेश जमवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस सरकार का एजेंडा बिल्कुल साफ है,कागजों में गरीब कम दिखाओ,बीपीएल योजनाओं का खर्च बचाओ,

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस बीपीएल अन्याय को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा प्रभावित परिवारों के नाम, दस्तावेज़ और प्रमाणों के साथ कांग्रेस सरकार की गरीब-विरोधी नीति को जनता के सामने लाएगी और सड़क से लेकर सदन तक गरीबों और पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों की लड़ाई पूरी ताकत से लड़ी जाएगी।

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