शिमला की सड़कों पर उतरे दृष्टिबाधित, 900 दिनों का धैर्य टूटा,सीएम आवास के घेराव का किया प्रयास
राजधानी शिमला आज एक बार फिर आंदोलन पर बैठे दृष्टिबाधित सड़कों उतर गए। पिछले 902 दिनों से धरने पर बैठे दृष्टिबाधित बेरोजगारों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 06-04-2026
राजधानी शिमला आज एक बार फिर आंदोलन पर बैठे दृष्टिबाधित सड़कों उतर गए। पिछले 902 दिनों से धरने पर बैठे दृष्टिबाधित बेरोजगारों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। बैकलॉग पदों को भरने और रोजगार की मांग को लेकर इन दृष्टिबाधितों ने सचिवालय से CM आवास की ओर कूच किया और मुख्यमंत्री आवास के घेराव का प्रयास किया।
इस दौरान पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका और हल्की धक्का मुक्की भी हुई। दृष्टिबाधित संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने सरकार पर "सौतेला व्यवहार" करने का सीधा आरोप लगाया है।बैकलॉग पदों की भर्ती: वर्ष 1995 से 2026 तक खाली पड़े बैकलॉग पदों को तत्काल भरा जाए।उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न पदों पर भर्तियां कर रही है, लेकिन क्लास-4 के वे पद नहीं निकाले जा रहे जिनके लिए वह पात्र हैं।
राजेश ठाकुर ने कहा कि बीजेपी सरकार द्वारा शुरू की गई 'सहारा योजना' पिछले 10 महीनों से बंद है, जिससे कई परिवारों का गुजर-बसर मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि UDID कार्ड में दिव्यांगता 90% है, जबकि बस कार्ड में इसे केवल 70% दर्शाया जा रहा है।
राजेश ठाकुर ने कड़े शब्दों में कहा कि 900 से अधिक दिनों के इस लंबे संघर्ष में सरकार ने केवल एक बार 12 फरवरी 2024 को न्याय एवं अधिकारिता मंत्री के साथ बैठक की थी।"हमें आश्वासन दिया गया था कि 29 फरवरी 2024 तक मांगों का हल निकाल लिया जाएगा और विशेष 'भर्ती मेला' लगाया जाएगा। लेकिन आज अप्रैल 2026 आ गया है और नतीजा सिफर है।"
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