समाज के लिए कुछ कर गुजरने के जुनून से देशराज शर्मा बने आदर्श शिक्षक

समाज मे ऐसे बिरले लोग ही होते है जिनके भीतर समाज के लिए कुछ करगुजरने का जुनून होता है। ऐसे ही एक शख्स है देशराज शर्मा। ज़िला सिरमौर के राईकी क्षेत्र के निहोग ग्राम के शिक्षक देशराज शर्मा की जीवनगाथा स्वयं में युवाओं, नेताओं और समाजसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत

Sep 14, 2025 - 13:44
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समाज के लिए कुछ कर गुजरने के जुनून से देशराज शर्मा बने आदर्श शिक्षक
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यंगवार्ता न्यूज़ - सराहां     14-09-2025

समाज मे ऐसे बिरले लोग ही होते है जिनके भीतर समाज के लिए कुछ करगुजरने का जुनून होता है। ऐसे ही एक शख्स है देशराज शर्मा। ज़िला सिरमौर के राईकी क्षेत्र के निहोग ग्राम के शिक्षक देशराज शर्मा की जीवनगाथा स्वयं में युवाओं, नेताओं और समाजसेवकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।  मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे देशराज ने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कठिनाइयों का सामना करते हुए अपना सफर तय किया। 

बचपन में सड़कों और बिजली की सुविधा का अभाव था, फिर भी ज्ञानार्जन की लगन ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया । शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कालाअंब के निजी उद्योग में क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की। लेकिन उनका सपना था कि वह एक आदर्श शिक्षक बनकर समाज के लिए कुछ करें। यह सपना 13 सितम्बर 1995 को पूरा हुआ जब उन्होंने राजकीय प्राथमिक विद्यालय लाना चेता से अध्यापक के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं।

30 वर्षों की शिक्षण यात्रा में उन्होंने कई विद्यालयों में कार्य करते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ जीवन मूल्यों का भी पाठ पढ़ाया। गरीब विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई, समाज में शिक्षा का प्रकाश फैलाया और क्षेत्रीय विकास हेतु सड़क निर्माण व अन्य कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। 

देशराज ने बी.एड, एम.एड, स्नातकोत्तर (राजनीति विज्ञान व शिक्षा विज्ञान) तथा यूजीसी नेट जैसी परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर अपनी अपनी काबिलियत का लोहा बनवाया। ईमानदारी, सरलता, न्यायप्रियता और समाज सेवा को उन्होंने में अपने जीवन का लक्ष्य बनाया।

परिवार से मिले संस्कार और गुरुजनों से मिली प्रेरणा ने उन्हें आदर्श शिक्षक के रूप में गढ़ा। आज शिक्षा विभाग में अपनी 30 वर्ष की अविरल सेवा पूर्ण करना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। देशराज शर्मा की जीवनगाथा इस सत्य को चरितार्थ करती है कि संघर्ष ही सफलता की कुंजी है और शिक्षा ही समाज सेवा का सर्वोत्तम मार्ग है।

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