हिमाचल सरकार का ग्रामीण विकास विभाग प्रदेश में पहली बार बावडिय़ों की गणना का कर रहा कार्यान्वयन
हिमाचल प्रदेश सरकार का ग्रामीण विकास विभाग प्रदेश में पहली बार चश्मे/बावडिय़ों की गणना का कार्यान्वयन कर रहा है। यह अभियान केंद्र सरकार के जल शक्ति विभाग की ‘सिंचाई गणना योजना’ के तहत 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित किया जा रहा
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 16-02-2026
हिमाचल प्रदेश सरकार का ग्रामीण विकास विभाग प्रदेश में पहली बार चश्मे/बावडिय़ों की गणना का कार्यान्वयन कर रहा है। यह अभियान केंद्र सरकार के जल शक्ति विभाग की ‘सिंचाई गणना योजना’ के तहत 100 प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में संचालित किया जा रहा है। अब तक राज्य में 54,620 चश्मे/बावड़ी की गणना पूरी की जा चुकी है।
हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य में स्प्रिंग्स ग्रामीण पेयजल और कृषि की मुख्य जीवन रेखा माने जाते हैं। इस पहल से पहली बार इन प्राकृतिक जल स्रोतों की वैज्ञानिक सूची तैयार की जा रही है। इससे राज्य में जल संसाधनों का सही आकलन संभव होगा और भविष्य की योजनाओं के लिए ठोस आधार तैयार होगा।
इस गणना का मुख्य उद्देश्य देश के महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक जल स्रोतों के लिए एक सशक्त और विश्वसनीय डाटाबेस तैयार करना है। इससे जल बजट बनाने, जल उपयोग दक्षता बढ़ाने और सूखते हुए स्प्रिंग्स के पुनरुद्वार के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में मदद मिलेगी। चश्मे/ बावडिय़ों की गणना को पूरी तरह डिजिटल और कागज रहित बनाया गया है।
डेटा संग्रह के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है, जबकि वास्तविक समय निगरानी और सत्यापन के लिए वेब पोर्टल विकसित किया गया है। इससे पारदर्शिता और सटीकता दोनों सुनिश्चित हो रही हैं। डेटा की विश्वसनीयता के लिए प्रत्येक स्प्रिंग का सटीक अक्षांश, देशांतर और उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरों के साथ सर्वेक्षण किया जा रहा है।
इससे एक प्रमाणित भौगोलिक डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में भी सटीक लोकेशन दर्ज करने के लिए ‘रिवर्स जीआईएस’ तकनीक और ‘लोकल गवर्नमेंट डायरेक्टरी’ कोड का उपयोग किया जा रहा है, ताकि हर जल स्रोत की सही पहचान सुनिश्चित की जा सके। यह पहल भविष्य में जल संरक्षण और सतत विकास की दिशा में हिमाचल प्रदेश के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।
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