हिमाचल में बेमौसमी बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें तबाह, सेब-गेहूं को भारी नुकसान
हिमाचल प्रदेश में बीते एक सप्ताह से जारी बेमौसमी बारिश- बर्फबारी,ओलावृष्टि और आंधी तूफ़ान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन और किन्नौर जिलों में सेब, गेहूं, जौ, मटर और स्टोन फ्रूट्स की तैयार फसल को 40% से 60% तक नुकसान पहुंचा
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 12-04-2026
हिमाचल प्रदेश में बीते एक सप्ताह से जारी बेमौसमी बारिश- बर्फबारी,ओलावृष्टि और आंधी तूफ़ान ने किसानों की कमर तोड़ दी है। शिमला, कुल्लू, मंडी, सोलन और किन्नौर जिलों में सेब, गेहूं, जौ, मटर और स्टोन फ्रूट्स की तैयार फसल को 40% से 60% तक नुकसान पहुंचा है।शिमला और कुल्लू के ऊंचाई वाले इलाकों में फ्लावरिंग स्टेज पर ओले गिरने से फूल झड़ गए।
मंडी, बिलासपुर, कांगड़ा और हमीरपुर में कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल खेतों में ही बिछ गई। सेब बागवानों ने कहा कि “पिछले साल सूखा, इस बार ओले पड़ने से बागवानों की फसलें खराब हुई है। साल भर की कमाई पर पानी फिर गया है ऐसे में किसानों बागवानों ने सरकार से आंकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
किसान नेता व बागवान हरीश चौहान का कहना है कि बार-बार मौसम की मार झेल रहे किसानों के लिए मौसम आधारित फसल बीमा योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है। बीमा कंपनियां नुकसान के बाद किसानों बागवानों को समय पर पैसे का भुगतान नहीं कर रही है जिससे बागवानों भारी नुक़सान उठाना पड़ रहा है। सरकार बीमा कंपनियां पर नकेल कसे ताकि बागवानों को इसका लाभ मिल सके।
वहीं राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा है कि बेमौसमी बारिश, बर्फबारी और ओलावृष्टि से किसानों बागवानों को नुकसान हुआ है। फिलहाल विभाग को आंकलन करने के आदेश दे दिए गए हैं लेकिन वर्तमान में मुआवजा राशि बेहद कम है जिसे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया जाएगा।
फसल बीमा योजना के माध्यम से किसान बागवान इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं से कुछ हद तक राहत ले सकते हैं और बीमा कंपनियां अगर किसानों बागवानों को मुआवजा राशि समय पर अदा नहीं करेगी तो उन पर सरकार कारवाई अमल में लाएगी।
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