नर्सरी की मान्यता के लिए बागवानी अनुसंधान केंद्र धौला कुआं पहुंची नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की टीम  

नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की टीम ने नर्सरी निरीक्षण एवं मान्यता के उद्देश्य से डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र धौला कुआं का दौरा किया। यह टीम का नेतृत्व कंसल्टेंट-कम-चेयरमैन डॉ. वाई.सी. गुप्ता कर रहे थे। टीम में डॉ. एस.के. चौरसिया उप निदेशक, एनएचबी शिमला , डॉ. राज कुमार उप निदेशक (कृषि), नाहन , डॉ. शिवाली धीमान विषय विशेषज्ञ तथा एनएचबी के प्रतिनिधि शामिल थे

Dec 11, 2025 - 19:42
Dec 11, 2025 - 20:04
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नर्सरी की मान्यता के लिए बागवानी अनुसंधान केंद्र धौला कुआं पहुंची नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड की टीम  
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यंगवार्ता न्यूज़ - पांवटा साहिब  11-12-2025

नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की टीम ने नर्सरी निरीक्षण एवं मान्यता के उद्देश्य से डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के क्षेत्रीय औद्यानिकी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केन्द्र धौला कुआं का दौरा किया। यह टीम का नेतृत्व कंसल्टेंट-कम-चेयरमैन डॉ. वाई.सी. गुप्ता कर रहे थे। टीम में डॉ. एस.के. चौरसिया उप निदेशक, एनएचबी शिमला , डॉ. राज कुमार उप निदेशक (कृषि), नाहन , डॉ. शिवाली धीमान विषय विशेषज्ञ तथा एनएचबी के प्रतिनिधि शामिल थे।

धौला कुआं केंद्र की सह निदेशक डॉ. प्रियांका ठाकुर तथा सहायक प्रोफेसर (फ्रूट साइंस) डॉ. शिल्पा ने टीम को शोध केंद्र की नर्सरी इकाइयों एवं प्रमुख फलों जैसे आम , लीची , अमरूद , नींबू , अंजीर , सपोटा , अनार , बेर , फालसा , करौंदा , लोकाट और जामुन के मदर ब्लॉकों का विस्तृत निरीक्षण करवाया। इस अनुसंधान केंद्र में वर्तमान में कुल 5.66 हेक्टेयर क्षेत्र नर्सरी उत्पादन एवं स्थापित मदर ब्लॉकों के अंतर्गत है। इसमें 10,000 वर्ग मीटर नर्सरी उत्पादन क्षेत्र, पॉलीहाउस, कार्य-शेड और एक विशेष लीची मदर ब्लॉक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लगभग 40,066 वर्ग मीटर क्षेत्र किन्नू, आम, अमरूद, साइट्रस, ड्रैगन फ्रूट, अंजीर, फालसा, करौंदा, आंवला, सपोटा और अनार आदि के मदर ब्लॉकों के अंतर्गत है। 
पिछले एक दशक में, धौला कुआं केंद्र ने हिमाचल प्रदेश सहित पड़ोसी राज्यों के किसानों को लाखों प्रमाणित नर्सरी पौध उपलब्ध करवाए हैं। शोध केंद्र मिट्टी एवं पॉलीबैग—दोनों तकनीकों से उच्च गुणवत्ता वाले पौध उत्पादन में विशेषज्ञता रखता है। वर्ष 2025–26 के लिए विभिन्न फसलों के कुल 23,102 नर्सरी पौध तैयार किए जा रहे हैं, जो वर्षभर किसानों के लिए उपलब्ध रहेंगे। इस केंद्र में समृद्ध प्रजातीय विविधता संरक्षित है, जिसमें 23 सिट्रस प्रजातियाँ, 15 आम की प्रजातियाँ, 5 लीची की प्रजातियां, तथा अमरूद, अंजीर, अनार, जामुन और सपोटा की कई प्रजातियां शामिल हैं।

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