एशिया युद्ध का असर : प्रदेश में रबी और सेब सीजन के बीच यूरिया खाद का संकट 

पश्चिम एशिया युद्ध का असर अब हिमाचल के खेतों और बागीचों तक पहुंचने लगा है। प्रदेश में रबी और सेब सीजन के बीच यूरिया खाद का संकट होने लगा है। राज्य में यूरिया की सप्लाई मुख्य रूप से नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) के माध्यम से होती

Mar 27, 2026 - 14:00
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एशिया युद्ध का असर : प्रदेश में रबी और सेब सीजन के बीच यूरिया खाद का संकट 
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    27-03-2026

पश्चिम एशिया युद्ध का असर अब हिमाचल के खेतों और बागीचों तक पहुंचने लगा है। प्रदेश में रबी और सेब सीजन के बीच यूरिया खाद का संकट होने लगा है। राज्य में यूरिया की सप्लाई मुख्य रूप से नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) के माध्यम से होती है। पिछले दो महीनों से कंपनी की ओर से आपूर्ति नहीं हो पाई है। 

इसके चलते सहकारी समितियों और अधिकृत विक्रेताओं के पास भी स्टॉक खत्म हो गया है। अधिकतर किसान-बागवान हिमफेड के केंद्रों से उर्वरकों की खरीद करते हैं। इसे देखते हुए हिमफेड ने इस बार इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (इफको) से यूरिया की खरीद की है, लेकिन वहां से भी उन्हें मांग के अनुसार कम सप्लाई मिली है। 

हिमफेड के आंकड़ों के अनुसार प्रदेशभर से 3626.100 मीट्रिक टन यूरिया की डिमांड आई है, लेकिन इफको से उन्हें मात्र 900 मीट्रिक टन की ही सप्लाई मिली है। इसे प्रदेश के कुछे केंद्रों पर भेज दिया गया है। मार्च और अप्रैल का समय बागवानी फसलों खासकर सेब के पेड़ों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान यूरिया का उपयोग पौधों की वृद्धि और उत्पादन बढ़ाने के लिए किया जाता है। 

इसके अलावा मटर, फूल गोभी सहित अन्य सब्जियों में यूरिया का थोड़ी थोड़ी मात्रा में कई बार प्रयोग किया जाता है। समय पर खाद नहीं मिलने से उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होने की आशंका है। केंद्र स्तर पर खाद का आवंटन समय पर नहीं हो पाया है, जिससे राज्यों को सप्लाई में देरी हो रही है। 

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे युद्ध से कच्चे माल विशेषकर प्राकृतिक गैस की उपलब्धता में आई कमी ने भी उत्पादन को प्रभावित किया है। प्रदेश में उर्वरक की कमी के बीच में एमओपी के दामों में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जो 50 किलो की बोरी 1800 रुपये में मिलती थी, अब किसानों को उसके 1850 रुपये अधिक चुकाने होंगे। इसके अलावा सभी उर्वरकों के दाम स्थिर हैं। हिमफेड के केंद्रों में 12,32,16 की 50 किलो की बोरी 1900 और यूरिया की 45 किलो की बोरी 266.50 रुपये में मिल रही है।

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