यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 17-04-2026
हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के चेस्टर हिल मामले में कथित गड़बड़ी को लेकर सीपीआईएम ने दोबारा सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस मामले में कार्यकारी मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर आरोप दोहराते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की है .सीपीआई की मांग है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की जाए .सीपीआईएम के राज्य सचिव संजय चौहान ने कहा कि सरकार अपनी जवाबदेही से पीछे नहीं हट सकती है। इस मामले पर सख़्त से सख़्त कार्रवाई अमल में लाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस पूरे मामले में कार्रवाई नहीं करती है, तो आने वाले वक़्त में पार्टी इसे लेकर बड़ा आंदोलन करेगी। बता दें कि चेस्टर हिल पर पहले ही तहसीलदार और एसडीएम स्तर से जांच रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है, जिसमें धारा-118 के उल्लंघन के प्रमाण मिले हैं।
इसके बावजूद न तो निर्माण कार्य पर कोई रोक लगाई है और न ही फ्लैट्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। बड़ा विवाद ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (जेडीए) को लेकर सामने आया है। आरोप है कि अन्य राज्यों के निवेशकों ने हिमाचल के एक ही परिवार से जुड़े चार सदस्यों के नाम पर जमीन खरीदी और फिर उस पर करोड़ों रुपये का निवेश कर टाउनशिप विकसित की. जेडीए के माध्यम से धारा-118 की शर्तों का उल्लंघन किया गया , जिसमें गैर-हिमाचली लोगों ने स्थानीय कृषकों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया। प्रदेश में लागू धारा-118 के तहत अन्य राज्यों के लोग सीधे तौर पर जमीन नहीं खरीद सकते। केवल वही व्यक्ति भूमि खरीद सकता है, जो राज्य का कृषक हो. इस कानून का उद्देश्य प्रदेश की भूमि को बाहरी प्रभाव से सुरक्षित रखना है। कई मामलों में देखा है कि बाहरी निवेशक स्थानीय लोगों को मोहरा बनाकर इस कानून को दरकिनार करते हैं और बड़े प्रोजेक्ट खड़े कर लेते हैं।
प्रेस वार्ता में पार्टी राज्य सचिव कामरेड संजय चौहान , पार्टी राज्य सचिव मंडल सदस्य डॉ. कुलदीप सिंह तंवर व विजेंद्र मेहरा मौजूद रहे। प्रेस वार्ता में कॉमरेड संजय चौहान व कुलदीप तंवर ने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने हैरानी व्यक्त की है कि करोड़ों रुपए के घोटाले को प्रदेश के मुख्यमंत्री अधिकारियों की आपसी खींचतान कहकर पूरे मामले की गंभीरता को कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चेस्टर हिल घोटाले में प्रदेश सरकार की अफसरशाही के सबसे बड़े अधिकारी मुख्य सचिव स्वयं संलिप्त हैं। इन अधिकारी पर राजस्व सचिव रहते हुए भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे तथा वह गिरफ्तार तक हो चुके हैं।
मुख्य सचिव की संपत्ति में पिछले कुछ सालों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश ब पंजाब में जो भी संपत्तियां खरीदी हैं, करोड़ों रुपयों की ये संपत्तियां कौड़ियों के भाव खरीदी गई हैं। इसमें भारी भ्रष्टाचार है। चेस्टर हिल घोटाले में नगर निगम सोलन आयुक्त एवं एसडीएम व तहसीलदार की दो जांच को दरकिनार करके मुख्य सचिव द्वारा क्लीन चिट देने से स्पष्ट हो गया है कि पूरी दाल ही काली है। इस मसले पर जिलाधीश की निष्क्रिय कार्यप्रणाली भी कई सवाल खड़ा करती रही है। मुख्य सचिव द्वारा जिलाधीश व जिला के न्यायिक अधिकारी की भूमिका को अपने पास केंद्रित करने से स्पष्ट है कि वे स्वयं पूरे घोटाले के सूत्रधार हैं।