सदन में चिट्टे पर हंगामा , नारेबाजी करते हुए  विपक्ष ने  सदन से किया वॉकआउट

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के छठे दिन सदन के भीतर उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला। जब शून्य काल के दौरान नशे का मुद्दा उठा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद विपक्ष ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए कि नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाई गई एसटीएफ के पुलिसकर्मी संलिप्त पाए गए और सरकार विपक्ष के नेताओं के फोन बिना इजाज़त सर्विलांस पर लेने में लगी हुई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में नशा गांव - गांव तक पहुंच चुका है

Mar 20, 2026 - 18:48
Mar 20, 2026 - 19:00
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सदन में चिट्टे पर हंगामा , नारेबाजी करते हुए  विपक्ष ने  सदन से किया वॉकआउट
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  20-03-2026

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के छठे दिन सदन के भीतर उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला। जब शून्य काल के दौरान नशे का मुद्दा उठा। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। इसके बाद विपक्ष ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। विपक्ष की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए कि नशे के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनाई गई एसटीएफ के पुलिसकर्मी संलिप्त पाए गए और सरकार विपक्ष के नेताओं के फोन बिना इजाज़त सर्विलांस पर लेने में लगी हुई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में नशा गांव - गांव तक पहुंच चुका है। 
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर मुख्यमंत्री नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कर रहे हैं , वहीं दूसरी ओर प्रदेश में युवा नशे के ओवरडोज के कारण चौक-चौराहों पर अपनी जान गंवा रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि जब उन्होंने इस गंभीर मुद्दे को सदन में उठाया, तो मुख्यमंत्री, मंत्री और पुलिस अधिकारी इस पर हंसते नजर आए, जो बेहद चिंताजनक और गैर-जिम्मेदाराना रवैया है। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि नशे के खिलाफ केवल दिखावे के लिए वॉकथन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें स्कूलों से बच्चों को बुलाकर 4 से 5 घंटे तक इंतजार करवाया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की कमी है। 
उन्होंने कहा कि बिना उचित जांच के पुलिस कर्मियों को एसटीएफ में तैनात किया गया है, जिससे नशे के खिलाफ अभियान की गंभीरता पर सवाल उठते हैं। विपक्ष ने पूर्व सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए दावा किया कि उस समय नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई थी, जिसके चलते कई लोगों को यह अवैध कारोबार छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश के अधिकारी केवल सरकार को खुश करने में लगे हुए हैं और विपक्ष के नेताओं के फोन सर्विलांस पर रखे जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर विपक्षी नेताओं की फोन निगरानी की गई थी।

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