कर्ज से उबरेंगे कारोबारी,दस लाख तक के कर्ज पर एक लाख रुपये चुकाएगी प्रदेश सरकार  

हिमाचल प्रदेश सरकार अब छोटे कारोबारियों को कर्ज से उबारेगी। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में एनपीए घोषित बैंक खातों वाले छोटे दुकानदारों को आर्थिक मदद मिलेगी। दस लाख तक के कर्ज पर एक लाख रुपये प्रदेश सरकार चुकाएगी

Dec 21, 2025 - 11:57
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कर्ज से उबरेंगे कारोबारी,दस लाख तक के कर्ज पर एक लाख रुपये चुकाएगी प्रदेश सरकार  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    21-12-2025 

हिमाचल प्रदेश सरकार अब छोटे कारोबारियों को कर्ज से उबारेगी। प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में एनपीए घोषित बैंक खातों वाले छोटे दुकानदारों को आर्थिक मदद मिलेगी। दस लाख तक के कर्ज पर एक लाख रुपये प्रदेश सरकार चुकाएगी। इसके लिए मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना लागू की गई है। 

जिन दुकानदारों का वार्षिक टर्नओवर 10 लाख रुपये से कम है और जिन्होंने अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 के बीच व्यापारिक ऋण लिया है, लेकिन भुगतान न कर पाने के कारण उनका खाता एनपीए घोषित हो गया है, वही इस योजना के पात्र होंगे। 

सरकार ऐसे पात्र दुकानदारों को बैंकों के माध्यम से एकमुश्त समाधान के तहत अधिकतम 1 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने इस योजना की बजट में घोषणा की थी। शनिवार को प्रधान सचिव शहरी विकास देवेश कुमार ने अधिसूचना जारी की। अधिसूचना के अनुसार प्रदेश के शहरी इलाकों में हजारों छोटे व्यापारी हैं। ये व्यापारी आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं और न ही उन्हें अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए कोई वित्तीय सहायता मिलती है। 

इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2023 से हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना शुरू की। अब इस योजना का विस्तार शहरी क्षेत्रों तक किया गया है। 

इसके तहत दस लाख रुपये से कम वार्षिक टर्नओवर वाले छोटे दुकानदारों को बैंकों के माध्यम से 1 लाख रुपये तक की वन-टाइम सेटलमेंट सुविधा प्रदान की जाएगी, जिसका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। अधिसूचना के अनुसार ओटीएस का उद्देश्य उधारकर्ताओं को अपना कर्ज चुकाने और आगे की कानूनी कार्रवाई को रोकने में मदद करना है। 

यदि किसी लाभार्थी पर एक लाख रुपये से अधिक बकाया है, तो शेष राशि उसे स्वयं जमा करनी होगी। हालांकि, योजना के तहत अधिकतम ऋण सीमा 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। जानबूझकर डिफॉल्ट, धोखाधड़ी और कदाचार  के मामलों को योजना से बाहर रखा गया है।

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