प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का किया ऐलान
हिमाचल प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। संयुक्त कार्यवाही समिति ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से स्पष्ट किया
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 13-04-2026
हिमाचल प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। संयुक्त कार्यवाही समिति ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से स्पष्ट किया है कि यदि उनकी पदोन्नति और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो शिक्षक कक्षाओं का बहिष्कार कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
JAC के अध्यक्ष जनार्दन सिंह ने कहा कि शिक्षकों के आक्रोश का सबसे बड़ा कारण यूजीसी (UGC) के 7वें वेतनमान को लागू करने के दौरान लगाई गई शर्तें हैं। प्रदेश सरकार ने वेतन आयोग तो लागू किया, लेकिन इसमें धारा संख्या 4 और 5 जोड़ दी। इन धाराओं के तहत पदोन्नति के लिए अलग से नियम बनाने की बात कही गई थी, जो साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी नहीं बने।
इसके चलते प्रदेश के 40% से 50% शिक्षकों की प्रमोशन रुकी पड़ी है।JAC के अध्यक्ष प्रो. जनार्दन सिंह के अनुसार, स्थिति इतनी भयावह है कि कई शिक्षक असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर भर्ती हुए और उसी पद से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने सरकार पर सौतेला व्यवहार का त्हाआरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों ने सरकार के समक्ष अपनी मांगों का पुलिंदा रखा लेकिन इस पर अभी तक कोई नतीजा नही निकला है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में यह रुकी प्रमोशन के कारण शिक्षक आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान है। वहीं JAC के महासचिव नितिन व्यास ने कहा कि इतिहास में पहली बार शिक्षकों को वेतन मिलने में देरी हो रही है। JAC का आरोप है कि बजट की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली इसके पीछे है।
शिक्षक पहले अलग-अलग लड़ रहे थे अब JAC के बैनर तले एकजुट हो चुके हैं।महासचिव डॉ. नितिन व्यास ने बताया कि इस संबंध में राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया है। राज्यपाल ने आश्वासन दिया है कि वे मुख्यमंत्री से इस विषय पर चर्चा करेंगे।शिक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री स्वयं इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एक शिष्टमंडल पुनः मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात रखेगा।यदि सरकार ने शीघ्र कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो शिक्षक मजबूरन कक्षाओं का बहिष्कार कर सड़कों पर उतरेंगे और बड़े आंदोलन करेगा साथ ही शैक्षणिक कार्य पूरी तरह ठप किया जा सकता है।सरकार को चाहिए कि वह CAS को तुरंत बहाल कर शिक्षकों के गतिरोध को समाप्त करे।
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