यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 07-01-2026
शिमला से जारी बयान में पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए आपत्तिजनक और अमर्यादित नारे एक सोची-समझी और घटिया साजिश का हिस्सा हैं। यह घटना वामपंथी और कांग्रेसी विचारधारा की उस हताशा को उजागर करती है , जिसमें सत्ता और जनसमर्थन से दूर होने के कारण अब नैतिकता, मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों को पूरी तरह त्याग दिया गया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर इस प्रकार की दुर्भावनापूर्ण गतिविधियां न केवल निंदनीय हैं , बल्कि देश की प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाने वाली हैं। नेता प्रतिपक्ष श्री जयराम ठाकुर ने इस घटना की कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह देशवासियों के दिलों में बसते हैं और राष्ट्र सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ऐतिहासिक है। आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाकर भरा है, देश के हर नागरिक तक सरकार और गुड गवर्नेंस पहुंचा है।
लाखों करोड़ की जनहित कार्य योजनाएं बिना रुके 12 साल से चल रहीहै। तो दूसरी तरफ अमित शाह जी के नेतृत्व में देश की आंतरिक सुरक्षा अभेद्य बनी हुई है। नक्सलियों का रेड कॉरिडोर महज कुछ किलोमीटर में सिमट कर रह गया है। जो बहुत जल्दी पूर्णतया समाप्त हो जाएगा। देश की प्रगति, बढ़ती शक्ति और शांति ही कुछ लोगों को रास नहीं आ रही है। जो आए दिन अपनी हताशा में इस तरीके की हरकतें करते रहतेहैं। ऐसे लोगों की दुर्भावनापूर्ण सोच और नारेबाजी से न तो देश का मनोबल टूटेगा और न ही जन विश्वास कमजोर होगा। देश की जागरूक जनता ने पहले भी इस तरह की नकारात्मक राजनीति को नकारा है और भविष्य में भी करारा जवाब देती रहेगी। बिहार और दिल्ली के मंच कांग्रेस नेताओं के मंच पर रहते देश के प्रधानमंत्री को गाली दी गई और उसका खामियाजा कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने भुगता। आगे भी ऐसी सोच रखने वाले लोग इसी तरह जनता के दिलों से उतरते जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस घटना की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि शैक्षणिक परिसरों को राजनीतिक षड्यंत्रों और अराजकता का अड्डा बनने से रोका जा सके। आपदा की मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए अपने आशियाने का सपना पहले ही कठिन हो चुका है, लेकिन व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सत्ता में आई सुख की सरकार लगातार उसे और महंगा बनाने में जुटी है। पहले भवन निर्माण के नक्शे पास करने की फीस में बेतहाशा वृद्धि की गई, फिर सरकार की मिलीभगत से सीमेंट के दाम बढ़ाए गए और अब रेरा के तहत हाउसिंग प्रोजेक्ट के पंजीकरण शुल्क में चार गुना बढ़ोतरी कर आम जनता पर एक और आर्थिक बोझ डाल दिया गया है।
इन फैसलों का सीधा असर मध्यम वर्ग, युवाओं और आपदा प्रभावित परिवारों पर पड़ेगा, जिनके लिए घर बनाना या खरीदना अब और भी मुश्किल हो गया है। भारतीय जनता पार्टी इस जनविरोधी निर्णय की कड़ी निंदा करती है। प्रदेश की जनता अब समझ चुकी है कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर केवल महंगाई और आम आदमी की परेशानियां ही बढ़ी हैं। सरकार को चाहिए कि वह जनहित में फैसले ले और लोगों के सपनों पर कुठाराघात करना बंद करे।