मुख्यमंत्री के शासनकाल में प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था चरमरा कर आर्थिक अराजकता की स्थिति में पहुंची : विपिन परमार 

भाजपा उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आज प्रशासनिक अव्यवस्था, वित्तीय कुप्रबंधन और राजकोषीय असंतुलन का शिकार बन चुका

Feb 19, 2026 - 17:03
Feb 19, 2026 - 17:03
 0  5
मुख्यमंत्री के शासनकाल में प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था चरमरा कर आर्थिक अराजकता की स्थिति में पहुंची : विपिन परमार 
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media

यंगवार्ता न्यूज़ - धर्मशाला    19-02-2026

भाजपा उपाध्यक्ष एवं विधायक विपिन सिंह परमार ने प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आज प्रशासनिक अव्यवस्था, वित्तीय कुप्रबंधन और राजकोषीय असंतुलन का शिकार बन चुका है। विपिन सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री के शासनकाल में प्रदेश की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गई है और हिमाचल आर्थिक अराजकता की स्थिति में पहुंच गया है। 

“यह सामान्य संकट नहीं है, यह शासन की विफल नीतियों का परिणाम है,” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा। विपिन सिंह परमार ने कहा कि वित्त आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को “केंद्र सरकार की कठपुतली” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और असंवैधानिक सोच को दर्शाता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग कोई राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त दायित्व निभाने वाली संस्था है। “शब्दों का चयन संयमित होना चाहिए। अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है,” उन्होंने कहा। 

विपिन सिंह परमार ने कहा कि लगभग 10,000 करोड़ रुपये के लंबित यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट (UC) को लेकर केंद्र सरकार द्वारा गंभीर आपत्तियां दर्ज की गई हैं। “यह कोई साधारण प्रशासनिक त्रुटि नहीं है। यदि विभागों के माध्यम से गलत उपयोगिता प्रमाण पत्र भेजे गए हैं तो यह गंभीर वित्तीय अनियमितता है। जब जांच होगी तो जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होगी,” उन्होंने चेतावनी दी। 

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र पोषित योजनाओं के लिए प्राप्त धन को योजनाओं में व्यय करने के बजाय कर्मचारियों के वेतन और पेंशन भुगतान में लगा दिया गया। बिलासपुर रेलवे परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लगभग 500 करोड़ रुपये रेलवे कार्यों के लिए आए थे, किंतु प्रदेश सरकार ने उस धन को अन्य मदों में समाहित कर लिया। 

योजनाओं का धन योजनाओं में ही लगना चाहिए था। यह वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन है,” उन्होंने कहा। विपिन सिंह परमार ने कहा कि FRBM अधिनियम के प्रावधान स्पष्ट हैं — राजकोषीय घाटा तीन प्रतिशत की सीमा में रहना चाहिए और राजस्व घाटा शून्य करने की दिशा में निरंतर प्रयास होने चाहिए। “परंतु सरकार ने इन चेतावनियों को कभी गंभीरता से नहीं लिया। न अधिकारियों ने ध्यान दिया और न ही मुख्यमंत्री ने इसे प्राथमिकता दी। 

उन्होंने आरोप लगाया। उन्होंने सदन में आंकड़े रखते हुए कहा कि 2022-23 में RDG मिलने के बावजूद राजस्व घाटा 6336 करोड़ रुपये रहा और 2023-24 में 8058 करोड़ रुपये RDG मिलने के बाद भी राजस्व घाटा 5569 करोड़ रुपये पर रहा। “जब इतनी बड़ी सहायता मिलने के बाद भी घाटा कम नहीं हुआ, तो यह स्पष्ट है कि समस्या नीति में है।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow