शिमला संसदीय क्षेत्र को मिले दो केंद्रीय विद्यालय , बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में मिलेगा बड़ा लाभ : सुरेश कश्यप

शिमला संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने शिमला संसदीय क्षेत्र के तहत दो केंद्रीय विद्यालय को मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया है सुरेश कश्यप जिला मुख्यालय नाहन में आज मीडिया से बातचीत कर रहे थे। सुरेश कश्यप ने कहा कि देशभर में केंद्र सरकार द्वारा 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोले जा रहे हैं जिनमें से दो शिमला संसदीय क्षेत्र के तहत कोटखाई और पांवटा साहिब को भी मंजूरी दी गई है। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार जताया है

Oct 3, 2025 - 18:37
Oct 3, 2025 - 19:42
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शिमला संसदीय क्षेत्र को मिले दो केंद्रीय विद्यालय , बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में मिलेगा बड़ा लाभ : सुरेश कश्यप
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  03-10-2025
शिमला संसदीय क्षेत्र के भाजपा सांसद सुरेश कश्यप ने शिमला संसदीय क्षेत्र के तहत दो केंद्रीय विद्यालय को मंजूरी देने के लिए केंद्र सरकार का आभार जताया है सुरेश कश्यप जिला मुख्यालय नाहन में आज मीडिया से बातचीत कर रहे थे। सुरेश कश्यप ने कहा कि देशभर में केंद्र सरकार द्वारा 57 नए केंद्रीय विद्यालय खोले जा रहे हैं जिनमें से दो शिमला संसदीय क्षेत्र के तहत कोटखाई और पांवटा साहिब को भी मंजूरी दी गई है। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय खोलने के बाद दोनों ही संसदीय क्षेत्र के बच्चों को इसका लाभ मिलेगा और इन विद्यालयों के खुलने से बच्चे शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ेंगे। वहीं सांसद सुरेश कश्यप नहीं यह भी कहा कि जीएसटी में किए गए सुधार से देश की जनता को बड़ी राहत मिलने वाली है और अब लोगों को राहत देते हुए जीएसटी के मात्र दो स्लैब रखे गए है। 
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले वस्तुओं के दामों में कमी आएगी जिस देश और प्रदेश की जनता को बड़ा लाभ मिलने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश में पारंपरिक परिधान तैयार करने वाले कामगारों को भी बड़ा लाभ मिलने वाला है और सीधे तौर करीब 15 हजार कामगार लाभान्वित होंगे। सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश फार्मास्यूटिकल का हब है और जीएसटी में सरलीकरण से इस सेक्टर को भी लाभ मिलेगा इसके साथ-साथ इंश्योरेंस सेक्टर में भी लोगों को बड़ा लाभ मिलने वाला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बच्चों की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके बच्चों की शैक्षिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए देश भर में सिविल क्षेत्र के अंतर्गत 57 नए केंद्रीय विद्यालय (केवी) खोलने को मंजूरी दे दी है जिसमें से दो हिमाचल को मिले है। 57 नए केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना के लिए निधियों की कुल अनुमानित आवश्यकता 5862.55 करोड़ रुपये (लगभग) है, जो 2026-27 से नौ वर्षों की अवधि को कवर करती है। 
इसमें 2585.52 करोड़ रुपये (लगभग) का पूंजीगत व्यय और 3277.03 करोड़ रुपये (लगभग) का परिचालन व्यय शामिल है। उल्लेखनीय है कि पहली बार इन 57 केंद्रीय विद्यालयों को बाल वाटिका, यानी बुनियादी चरण (प्री-प्राइमरी) के 3 वर्षों के साथ मंजूरी दी गई है। सुरेश कश्यप ने कहा कि नवीनतम जीएसटी सुधारों ने देश भर में बोझ कम किया है और विभिन्न राज्यों व क्षेत्रों को इसके विविध लाभ मिले हैं। हिमाचल प्रदेश, जो अपने समृद्ध पारंपरिक शिल्प, विशिष्ट कृषि उपज और बढ़ते उद्योगों के लिए जाना जाता है, में जीएसटी दरों में हालिया कटौती का गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है। ये छोटे कारीगरों और बुनकरों के लिए राहत, किसानों और कृषकों के लिए नए अवसर और हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक समूहों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धात्मकता लाएँगे। ये सुधार मिलकर आजीविका को मजबूत करेंगे और राज्य को निरंतर विकास की ओर अग्रसर करेंगे। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध हथकरघा उत्पादों, खासकर शॉल और ऊनी वस्त्रों को नए जीएसटी ढांचे में राहत मिलने की उम्मीद है। ये उत्पाद सिर्फ़ स्मृति चिन्ह नहीं हैं; ये हज़ारों कारीगरों की आजीविका का ज़रिया हैं। कुल्लू घाटी में, स्वयं सहायता समूहों से जुड़े 3,000 से ज़्यादा बुनकर चमकीले पैटर्न वाले, जीआई-टैग वाले, कुल्लू शॉल बनाते हैं। ये बुनकर राज्य भर के अनुमानित 10,000-12,000 हथकरघा कारीगरों का हिस्सा हैं, जो इन हस्तशिल्पों से अपनी आजीविका चलाते हैं। 
पड़ोसी किन्नौर जिले के शॉल, जो जटिल पौराणिक रूपांकनों से सजे हैं, कई हज़ार कारीगरों द्वारा बुने और हाथ से रंगे जाते हैं। जीएसटी 12% से घटाकर 5% होने से, उपभोक्ताओं के लिए इन हस्तनिर्मित उत्पादों की लागत में कमी आने की उम्मीद है। यह कदम कारीगरों की प्रतिस्पर्धात्मकता एवं आय को सीधे तौर पर बढ़ावा देता है। पश्मीना शॉल को भी 12% से बढ़ाकर 5% कर दिए जाने से लाभ हुआ है। हालांकि इसे अक्सर कश्मीर से जोड़ा जाता है, हिमाचल प्रदेश का अपना उत्पादन लाहौल-स्पीति, किन्नौर, कुल्लू, मंडी और शिमला जैसे क्षेत्रों में भी होता है। हथकरघा क्षेत्र के 10,000-12,000 कारीगरों में से कई पश्मीना से जुड़े हैं और शानदार ऊनी शिल्प तैयार करते हैं। कर में कटौती से इस उच्च-मूल्य वाले क्षेत्र में भी राहत मिली है, जिससे कारीगरों को मार्जिन बनाए रखते हुए अपने शॉलों की कीमत अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल सकती है।

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