प्रदेश सरकार ने: पंचायत चुनाव के आरक्षण रोस्टर के लिए नियमों में किया संशोधन, अधिसूचना जारी
प्रदेश सरकार ने आपत्तियों पर विचार करने के बाद हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 में और संशोधन करने के लिए नियम तय कर दिए हैं। संशोधित नियमों के तहत 95 प्रतिशत पंचायतों का आरक्षण नियमों के तहत होगा
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 31-03-2026
प्रदेश सरकार ने आपत्तियों पर विचार करने के बाद हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 में और संशोधन करने के लिए नियम तय कर दिए हैं। संशोधित नियमों के तहत 95 प्रतिशत पंचायतों का आरक्षण नियमों के तहत होगा, जबकि 5 प्रतिशत पंचायतों में डीसी भौगोलिक और अन्य विशिष्ट परिस्थितियों को ध्यान में रखते आरक्षण रोस्टर बदल सकेंगे।
पंचायतीराज विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार अब डीसी विशेष परिस्थितियों में पंचायतों के रोस्टर में सीमित बदलाव कर सकेंगे। पंचायतीराज विभाग के सचिव की ओर से इसे लेकर अधिसूचना जारी की गई है। सरकार ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (चुनाव) संशोधन नियम, 2026 लागू कर दिए हैं।
इसके तहत ग्राम पंचायतों के सदस्यों, प्रधानों और पंचायत समिति अध्यक्षों के रोस्टर में अधिकतम पांच प्रतिशत तक परिवर्तन करने का प्रावधान किया गया है। यह बदलाव भौगोलिक और अन्य विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जा सकेगा। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह संशोधन नियमों में पूर्व में प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार करने के बाद किया गया है।
सरकार का कहना है कि कई क्षेत्रों में भौगोलिक विषमताओं के कारण रोस्टर लागू करने में दिक्कतें आ रही थीं, जिसे दूर करने के लिए यह कदम उठाया गया है। बता दें, पंचायतों और नगर निकायों के पूर्व पदाधिकारियों का कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है। इस वजह से पंचायत और निकायों में सरकार ने प्रशासक बिठा रखे हैं, क्योंकि राज्य में चुनाव समय पर नहीं करवाए जा सके।
सोलन, मंडी और पालमपुर नगर निगमों में मेयर व डिप्टी मेयर पदों के आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार तीनों नगर निगमों में अनुसूचित जनजाति की आबादी अपेक्षाकृत कम पाई गई, जिसके चलते मेयर पद को अनारक्षित (सामान्य वर्ग) रखने का निर्णय लिया गया।
सोलन में कुल 47,418 आबादी में एसटी की संख्या मात्र 556 है, जबकि मंडी में 41,375 में 288 और पालमपुर में 40,385 में 3,428 एसटी आबादी दर्ज की गई है। विभागीय मानकों के अनुसार आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के अनुपात से किया जाता है।
चूंकि तीनों नगर निगमों में एसटी का प्रतिशत तय सीमा से कम रहा, इसलिए आरक्षण लागू नहीं हो पाया। पहले इन पदों के एसटी वर्ग के लिए आरक्षित होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अंतिम आंकड़ों ने स्थिति स्पष्ट कर दी। अब सरकार की मंजूरी के बाद चुनावी अधिसूचना जारी होने का रास्ता साफ हो गया है।
What's Your Reaction?




