डॉ बशीर बद्र के शेर लोगों की जिंदगी का बन गए हैं हिस्सा, कलाधारा संस्था ने डॉ बशीर बद्र के निधन को बताया अपूरणीय क्षति
मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन ने साहित्यिक जगत को दुख में डुबो दिया है। शहर के अदबी माहौल को जिंदा रखने वाली कलाधारा संस्था ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए दिवंगत शायर को श्रद्धांजलि दी है।
मशहूर शायर बशीर बद्र के निधन ने साहित्यिक जगत को दुख में डुबो दिया है। शहर के अदबी माहौल को जिंदा रखने वाली कलाधारा संस्था ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए दिवंगत शायर को श्रद्धांजलि दी है।
कलाधारा संस्था से नासिर यूसुफजई, भुवन जोशी, पंकज तन्हा, जावेद उल्फत, दीपराज विश्वास, दीपचंद कौशल, विजय रानी बंसल, सरला गौतम ने कहा कि उनकी शायरी में दर्द भी था, अपनापन भी और जिंदगी की सच्चाइयों का गहरा एहसास भी। बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने कठिन अल्फाजों के बजाय आम बोलचाल की भाषा में दिल की बात कही। यही वजह रही कि उनके शेर सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों की जिंदगी और बातचीत का हिस्सा बन गए। उनका मशहूर शेर लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में.., आज भी संवेदनाओं को उतनी ही गहराई से छूता है।
शायर नासिर यूसुफजई ने कहा ने अपनी शब्द श्रद्धांजलि में कहा कि बशीर बद्र का जाना साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी रचनाधर्मिता से उर्दू शायरी को नई पहचान दी। आम भाषा में गहरी संवेदनाओं को व्यक्त करने की उनकी क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती थी। उन्होंने कहा कि बशीर बद्र अपने शब्दों और विचारों के माध्यम से हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।
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