सरकार की ओर से अस्पतालों को उपलब्ध करवाए जाने वाले सामान का अब हिमकेयर योजना के तहत नहीं होगा भुगतान
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से अस्पतालों को उपलब्ध करवाए जाने वाले सामान का अब हिमकेयर योजना के तहत भुगतान नहीं होगा। प्रदेश सरकार अस्पतालों को जिन सुविधाओं के लिए बजट उपलब्ध करवाती है उन्हें हिमकेयर के दायरे से बाहर करने का फैसला लिया गया
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 10-04-2026
हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से अस्पतालों को उपलब्ध करवाए जाने वाले सामान का अब हिमकेयर योजना के तहत भुगतान नहीं होगा। प्रदेश सरकार अस्पतालों को जिन सुविधाओं के लिए बजट उपलब्ध करवाती है उन्हें हिमकेयर के दायरे से बाहर करने का फैसला लिया गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया।
अब तक ऐसी सुविधाओं के भी हिमकेयर में बिल बनाए जा रहे थे जिसके लिए सरकार अस्पतालों को सालाना बजट उपलब्ध करवा रही है। इससे सरकार पर दोगुना बोझ पड़ रहा था। सरकार ने हिमकेयर योजना के तहत 9 तरह के क्लेम पर पाबंदी लगाई है।
अस्पतालों में पंजीकरण शुल्क, सामान्य वार्ड के बेड चार्ज, नर्सिंग और बोर्डिंग शुल्क, सर्जन, एनेस्थेटिस्ट, मेडिकल प्रैक्टिशनर और कंसल्टेंट की फीस, एनेस्थीसिया, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, ऑक्सीजन, ओटी चार्ज और सर्जिकल उपकरणों की लागत, दवाइयां और ड्रग्स, पैथोलॉजी व रेडियोलॉजी जांच यानी एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन, लैब डायग्नोस्टिक्स आदि, जिनकी दरें संबंधित संस्थानों की ओर से अनुमोदित हों।
मरीज का भोजन, प्री और पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन खर्च उपचार से पहले और डिस्चार्ज के 15 दिन तक की जांच, दवाइयां आदि का अब हिमकेयर योजना में दावा नहीं किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इन सभी मदों के लिए सरकार अलग से अस्पतालों को बजट उपलब्ध करवाती है।
प्रतिपूर्ति दावों की यह राशि प्रदेश सरकार की ओर से हिमकेयर योजना के तहत वहन करने के अलावा सरकारी अस्पतालों को बजट में उपलब्ध करवाई जा रही है। इस तरह से एक ही तरह के पैकेज के लिए दो अलग-अलग तरीकों से सरकार की ओर से धनराशि उपलब्ध करवाई जा रही थी। इस युक्तिकरण के बाद जो राशि बजट में सरकारी अस्पतालों को प्रदान की जाएगी।
वह हिमकेयर पैकेज का हिस्सा नहीं होगी। इसके अलावा सरकार ने फैसला लिया है कि अब क्लेम का भुगतान वास्तविक खर्च या तय पैकेज रेट, जो भी कम होगा उसी के आधार पर किया जाएगा। साथ ही सरकारी अस्पतालों को वास्तविक व्यय के बिल प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।
इसके अलावा उपचार से जुड़े अन्य खर्च जो सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होंगे और राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले बजट में भी शामिल होंगे उन्हें भी क्लेम में शामिल नहीं किया जाएगा।
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