प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियों के बीच निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने की नीति पर मंथन
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियों के बीच निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने की नीति पर मंथन चल रहा है। पंचायतीराज विभाग ने सरकार को इस संबंध में तीन विकल्प सुझाते हुए विस्तृत प्रस्ताव भेजा
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 14-04-2026
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियों के बीच निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों को प्रोत्साहित करने की नीति पर मंथन चल रहा है। पंचायतीराज विभाग ने सरकार को इस संबंध में तीन विकल्प सुझाते हुए विस्तृत प्रस्ताव भेजा है।
इनमें निर्विरोध पंचायतों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि को बढ़ाने, वर्तमान में राशि न देने या पूर्व की तरह प्रति पंचायत 10 लाख रुपये दिए जाने को लेकर विकल्प शामिल हैं। पिछली बार प्रदेश में 104 पंचायतें निर्विरोध चुनी गई थीं, जिन्हें सरकार की ओर से प्रति पंचायत 10 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई थी।
इस पहल का कारण पंचायत चुनाव में आपसी सहमति को बढ़ावा देना था, जिससे चुनावी खर्च और विवादों में कमी लाई जा सके। प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से अधिक पंचायतें निर्विरोध चुनी जा सकती हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया सरल और कम खर्चीली होगी। तीसरे विकल्प के तौर पर विभाग ने पूर्व की व्यवस्था को जारी रखने का सुझाव दिया है, जिसके तहत पंचायतों को 10 लाख रुपये दिए जाते रहे हैं।
विभाग का मानना है कि यह मॉडल पहले से प्रभावी रहा है और इसमें बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। फाइल में तीनों विकल्पों के फायदे और संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है। अंतिम निर्णय अब राज्य सरकार को लेना है। माना जा रहा है कि सरकार वित्तीय स्थिति, पंचायतों की संख्या और चुनावी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल्द ही इस पर फैसला ले सकती है।
हिमाचल में पंचायतीराज संस्थाओं को लेकर शैक्षणिक योग्यता नहीं होगी। सोशल मीडिया में तरह तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि पंचायत प्रधान का चुनाव लड़ने के लिए 10वीं पास होना अनिवार्य है। पंचायतीराज विभाग ने इसे सिरे से खारिज किया है।
What's Your Reaction?




