डीसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी बायोडाटा दवा कंपनी से निकाली महिला कामगार 

एक तरफ तो हिमाचल प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं चला रही है , दूसरी और आलम यह है कि हिमाचल प्रदेश में स्थापित कई उद्योग हिमाचली कामगारों का शोषण कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पांवटा साहिब स्थित दवा निर्माता कंपनी बायोडाटा में सामने आया है। जहां कंपनी ने करीब पिछले 14 वर्षों से कंपनी में तैनात महिला कामगारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। महिला कामगारों का कहना है कि कंपनी ने बिना नोटिस के ही उन्हें बाहर किया है

Jan 22, 2026 - 18:00
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डीसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी बायोडाटा दवा कंपनी से निकाली महिला कामगार 
 
यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  22-01-2026
एक तरफ तो हिमाचल प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं चला रही है , दूसरी और आलम यह है कि हिमाचल प्रदेश में स्थापित कई उद्योग हिमाचली कामगारों का शोषण कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला पांवटा साहिब स्थित दवा निर्माता कंपनी बायोडाटा में सामने आया है। जहां कंपनी ने करीब पिछले 14 वर्षों से कंपनी में तैनात महिला कामगारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। महिला कामगारों का कहना है कि कंपनी ने बिना नोटिस के ही उन्हें बाहर किया है। 
कंपनी की मनमानी से परेशान करीब एक दर्जन से अधिक महिलाएं आज जिला मुख्यालय नाहन स्थित डीसी कार्यालय पहुंची जहां उन्होंने न केवल धरना प्रदर्शन किया , बल्कि सरकार के खिलाफ भी खूब जहर उगला। महिलाओं के साथ पहुंचे मजदूर नेता प्रदीप चौहान ने उद्योग मंत्री को भी खूब खरी खोटी सुनाई। प्रदीप चौहान ने आरोप लगाया कि उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के गृह जिला में पिछले 3 महीने से करीब एक दर्जन से अधिक महिलाएं दर-दर की ठोकरें खा रही है और उद्योग मंत्री हाथ पैर हाथ धरे बैठे हैं। प्रदीप चौहान ने आरोप लगाया कि उद्योग मंत्री की शय पर ही पांवटा साहिब में स्थापित उद्योग मनमानी कर रहे हैं। प्रदीप चौहान ने कहा कि महिलाओं को पता चला कि आज उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान जिला मुख्यालय नाहन पहुंचने वाले हैं जिसके चलते हुए उनसे मिलने पहुंचे , लेकिन उद्योग मंत्री के पास इतना समय नहीं था कि वह धरने पर बैठी महिला कामगारों की दास्तान सुनते। 
प्रदीप चौहान ने कहा कि सरकार एक तरफ तो हिमाचल प्रदेश में बेटी है अनमोल जैसे कार्यक्रम चल रही है , दूसरी और हिमाचल की महिलाओं को उद्योगपतियों द्वारा बिना नोटिस बहार किया जा रहा है। प्रदीप चौहान ने सरकार से यहां तक मांग की की उद्योग मंत्री को तुरंत पद से हटाया जाए , क्योंकि उनके गृह जिला में महिलाओं का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि पांवटा साहिब स्थित दवा निर्माता कंपनी बायोवेदा में पिछले करीब 14 से 15 वर्षों से महिलाएं काम कर रही है , लेकिन अब अचानक उद्योग प्रबंधन ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया है जिसके चलते महिलाएं अब दर दर की ठोकरें खाने को विवश है। उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मजबूरन उन्हें सड़क पर धरना प्रदर्शन करने को विवश होना पड़ेगा। 
उन्होंने कहा कि मामले को लेकर उप मंडल अधिकारी पांवटा साहिब से भी बातचीत की गई थी। उनके सामने कंपनी प्रबंधन ने दोबारा काम पर रखने का आश्वासन दिया था मगर अब कंपनी ने काम पर नहीं रख रही है जिसके बाद वह अपनी समस्या को लेकर डीसी के पास पहुंचे है। उधर महिलाओं के साथ धरने पर बैठे मजदूर नेता प्रदीप चौहान ने कहा कि कंपनी लगातार मनमाना रवैया अपनी हुई है और संबंधित विभाग भी समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि उप मंडल स्तर पर अधिकारियों के सामने इस मामले को उठाया गया था मगर समस्या अभी भी बरकरार है।

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