यंगवार्ता न्यूज़ - बिलासपुर 05-02- 2026
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बिलासपुर जिला के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं में एक विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए री-रड़ोह पुल तथा दधोग टपें गांव में पुल के निर्माण के लिए अढ़ाई करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने बरठीं, गेहड़वी और झंडूता स्कूल को सीबीएसई पाठ्यक्रम पर आधारित करने की भी घोषणा की। उन्होंने तलाई में सब तहसील, मल्होट में कॉपरेटिव बैंक खोलने की घोषणा की। पीएचसी कलोल को अपग्रेड करने की घोषणा की। उन्होंने भल्लू घाट पुल पर हुए सड़क हादसे के प्रभावित 16 परिवारों को 31-31 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की। इसके अलावा उन्होंने मरणोपरांत शौर्य चक्र विजेता बलदेव चंद के परिजनों को भी सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि पहली बार हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का मुख्यमंत्री बना। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं कि कभी आम परिवार से निकल कर प्रदेश की सेवा करने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के पांच हजार करोड़ रुपये लोगों में बांटने की बजाय राजनीतिक लाभ के लिए खर्च किए।
वर्तमान सरकार से पिछली भाजपा सरकार को 50 हजार करोड़ अधिक मिला और 50 हजार करोड़ कर्ज के तौर पर लिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने आय के संसाधन पैदा किए और भ्रष्टाचार के दरवाजों को बंद किया। वर्तमान सरकार ने 23 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिया और 26 हजार करोड़ रुपए ब्याज और मूलधन वापिस किया। श्री सुक्खू ने कहा कि संविधान के प्रावधानों के मुताबिक 73 साल से हिमाचल प्रदेश को ग्रांट मिल रही थी लेकिन अब इसे बंद कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश में 68 प्रतिशत वन भूमि है और लोग 32 प्रतिशत भूमि पर गुजारा करते हैं। लेकिन इस बात को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि एक फरवरी हिमाचल प्रदेश के इतिहास का काला दिन है, जब केंद्र सरकार ने हर साल मिलने वाले लगभग दस हजार करोड़ रुपये की ग्रांट बंद कर दी। उन्होंने कहा, ‘‘आज भाजपा के सांसदों और विधायकों से पूछा जाना चाहिए, क्या पांच साल में न मिलने वाले 50 हजार करोड़ के विरुद्ध आवाज उठाएगें? इसके विरुद्ध प्रदेश की जनता को आवाज उठानी पड़ेगी क्योंकि यह लोगों के अधिकारों पर डाका है। हम यह लड़ाई जनता के सहयोग से लड़ेंगे।
हिमाचल के अधिकारों के लिए हम भाजपा विधायकों के नेतृत्व में दिल्ली जाने को तैयार हैं। आज मैं मुख्यंमत्री हूं, कल कोई और होगा लेकिन हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मछुआरों की रॉयल्टी को राज्य सरकार ने 15 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया है और आने वाले समय में इसे और कम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बेसहारा पशुओं को सहारा देने के लिए राज्य सरकार ने प्रति पशु सहायता 700 से बढ़ाकर 1200 रुपए किया। उन्होंने कहा कि मुझ पर ओपीएस बंद करने का दबाव है, लेकिन मैं इस दबाव के आगे नहीं झुका। भाजपा की सरकार ने राजस्थान में आते ही सरकारी कर्मचारियों की ओपीएस को बंद करना का निर्णय ले लिया है। लेकिन जब तक हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, तब तक ओपीएस बंद नहीं होगी। हालाँकि केंद्र सरकार ने ओपीएस लागू करने पर 1600 करोड़ रुपए की मदद बंद कर दी। हम युवाओं को रोजगार दे रहे हैं लेकिन केन्द्र की भाजपा सरकार ने प्रदेश को अग्निवीर दिए। उन्होंने कहा कि दस वर्ष में केंद्र सरकार ने प्रदेश के सैनिकों को अग्निवीर बनाकर छोड़ दिया। क्या किसी न सोचा कि चार साल बाद युवा क्या करेंगे? मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के दौरान 9300 करोड़ रुपए नुकसान का आकलन केंद्र सरकार की टीम ने किया लेकिन भाजपा के सांसद संसद में खामोश रहे।
भाजपा सांसदों ने एक भी सवाल संसद में नहीं पूछा। उन्होंने कहा, ‘‘मैं हर आपदा प्रभावित क्षेत्र में गया। मैं झंडूता भी आया। किसी ने माँग नहीं की लेकिन लोगों के दर्द को देखते हुए हमने घर गिरने पर मिलने वाले मुआवजे को डेढ़ लाख रुपए से बढ़ाकर सात लाख रुपए किया। शहर में दस हजार और गांवों में पांच हजार रुपए किराया दिया। आम आदमी का दर्द बांटना ही व्यवस्था परिवर्तन है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने लोकतंत्र को खरीदने और सरकार गिराने का प्रयास किया गया। नौ विधायक सरकार को छोड़ कर चले गए। देश के इतिहास में पहली बार आजाद विधायक इस्तीफा स्वीकार करवाने के लिए धरने पर बैठ गए। लेकिन जनता के आशीर्वाद से कांग्रेस फिर से चालीस की संख्या पर पहुंच गई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की सोच से लोगों को रोजगार देने के लिए मनरेगा शुरू की, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार ने इस योजना की आत्मा को ही समाप्त कर दिया। इस कदम से रोजगार के अवसरों को केंद्र सरकार ने छीन लिया। लेकिन भाजपा के सारे सांसद चुप हैं। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने झण्डूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं में 42.43 करोड़ रुपये की 4 विकासात्मक परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास किये। मुख्यमंत्री ने 3.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित परमवीर चक्र विजेता नायब सूबेदार संजय कुमार राजकीय बहुतकनीकी, कलोल के प्रशासनिक भवन का उद्घाटन किया।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने 12.88 करोड़ रुपये की लागत से घुमारवीं-बरठीं-शाहतलाई सड़क के उन्नयन कार्य, 25 करोड़ रुपये से शाहतलाई नगर के लिए मल निकासी योजना (पुनरीक्षित) के निर्माण कार्य तथा 1.25 करोड़ रुपये की लागत से शाहतलाई में चरण गंगा के सौंदर्यकरण के कार्य का शिलान्यास भी किया। इससे पहले लोगों ने मुख्यमंत्री का बरठीं पहुंचने पर खुली जीप में उनका भव्य स्वागत किया। कांग्रेस नेता विवेक कुमार ने मुख्यमंत्री का झंडूता विधानसभा क्षेत्र पहुँचने पर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को आगे ले जाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तीन प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के बावजूद वह दिन रात प्रदेश की जनता के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सौतेले रवैये के बावजूद वह हिमाचल प्रदेश लोगों को राहत पहुंचाने में लगे हैं।
आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राज्य सरकार ने मुआवजा राशि में कई गुणा बढ़ौतरी की है और घर को नुकसान होने पर अब आठ लाख रुपए की राहत राशि प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 21वें स्थान से 5वें स्थान पर पहुंचा है। आज प्रदेश के अनाथ बच्चों को राज्य सरकार ने ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है। इस अवसर पर तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, पूर्व विधायक बंबर ठाकुर व बीरू राम किशोर, जिला कांग्रेस की अध्यक्ष अंजना धीमान, कांग्रेस नेता सुभाष डढवालिया, उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार तथा एसपी संदीप धवल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।