मुकेश अग्निहोत्री ने चिंतपूर्णी मंदिर में नवाया शीश, मातारानी के श्रीचरणों में अपनी सुपुत्री के विवाह का दिया निमंत्रण पत्र 

पमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री बुधवार को विश्वविख्यात शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर पहुंचे। उन्होंने मातारानी के श्रीचरणों में अपनी सुपुत्री के विवाह का निमंत्रण पत्र अर्पित कर 'आशीर्वादोत्सव' का न्योता दिया

Oct 15, 2025 - 19:05
Oct 15, 2025 - 19:40
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मुकेश अग्निहोत्री ने चिंतपूर्णी मंदिर में नवाया शीश, मातारानी के श्रीचरणों में अपनी सुपुत्री के विवाह का दिया निमंत्रण पत्र 
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मातारानी के श्रीचरणों में सुपुत्री के विवाह का निमंत्रण पत्र अर्पित कर दिया न्योता* 

यंगवार्ता न्यूज़ - ऊना    15-10-2025

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री बुधवार को विश्वविख्यात शक्तिपीठ माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर पहुंचे। उन्होंने मातारानी के श्रीचरणों में अपनी सुपुत्री के विवाह का निमंत्रण पत्र अर्पित कर 'आशीर्वादोत्सव' का न्योता दिया। उनकी सुपुत्री डॉ. आस्था अग्निहोत्री और होने वाले दामाद एसडीएम अंब सचिन शर्मा भी साथ रहे। 

उन्होंने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर शीश नवाया, पवित्र हवन में आहुति अर्पित की तथा सभी के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं शांति की कामना की।
उन्होंने बताया कि माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से भव्य भवन निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्य किया जा रहा है। 

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 8 अगस्त 2023 से ‘सुगम दर्शन प्रणाली’ लागू की गई है, जिससे भीड़ प्रबंधन अधिक सुचारु हुआ है तथा वृद्धजनों और दिव्यांगजनों को विशेष सुविधा मिल रही है। इसके अतिरिक्त, ऑनलाइन लंगर बुकिंग और ऑनलाइन दर्शन जैसी डिजिटल सेवाएं भी आरंभ की गई हैं।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ‘प्रसाद योजना’ के तहत 56.26 करोड़ रुपये की स्वीकृति माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर के लिए प्रदान की गई है, जिससे धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक विरासत को सुदृढ़ किया जा रहा है। परंपरागत पूजा-पद्धति की शुद्धता बनाए रखने के लिए फरवरी 2025 में मंदिर न्यास के पुजारियों को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से ऑनलाइन प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। सरकार का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को उत्कृष्ट सुविधाएं मिलें, पारंपरिक पूजा-पद्धति की गरिमा बनी रहे और मंदिरों का विकास डिजिटल व व्यवस्थित स्वरूप में हो।

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