प्रदेशव्यापी हड़ताल के दौरान एंबुलेंस सेवाएं पूर्ण रूप से रहीं बाधित, हड़ताल का महापड़ाव आज समाप्त   

हिमाचल प्रदेश 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन संबंधित सीटू के बैनर तले प्रदेश में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों द्वारा श्रम कानूनों व न्यायिक आदेशों को लागू करने, न्यूनतम वेतन व कर्मचारियों की प्रताड़ना बंद करने सहित अन्य मांगों को पूर्ण करने के लिए चली पांच दिन की हड़ताल व शिमला में हुआ महापड़ाव समाप्त

Apr 10, 2026 - 20:03
Apr 10, 2026 - 20:20
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प्रदेशव्यापी हड़ताल के दौरान एंबुलेंस सेवाएं पूर्ण रूप से रहीं बाधित, हड़ताल का महापड़ाव आज समाप्त   
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    10-04-2026

हिमाचल प्रदेश 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन संबंधित सीटू के बैनर तले प्रदेश में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों द्वारा श्रम कानूनों व न्यायिक आदेशों को लागू करने, न्यूनतम वेतन व कर्मचारियों की प्रताड़ना बंद करने सहित अन्य मांगों को पूर्ण करने के लिए चली पांच दिन की हड़ताल व शिमला में हुआ महापड़ाव समाप्त हो गया। 

इस दौरान सैंकड़ों एंबुलेंस कर्मी प्रदेश सरकार सचिवालय छोटा शिमला पर भारी बारिश व ठंड के बावजूद डटे रहे। प्रदेशव्यापी हड़ताल के दौरान एंबुलेंस सेवाएं पूर्ण रूप से बाधित रहीं। यूनियन ने चेताया है कि अगर शीघ्र ही मांगों की पूर्ति न हुई तो यूनियन निर्णायक संघर्ष की ओर बढ़ेगी। 

शिमला में अंतिम दिन के धरने में कर्मियों ने प्रदेश सरकार सचिवालय छोटा शिमला से नेशनल हेल्थ मिशन के प्रबंध निदेशक कार्यालय कुसुंपटी तक एक रैली का आयोजन किया। रैली के बाद दो घंटों तक कर्मी एनएचएम कार्यालय पर डटे रहे। इस दौरान एनएचएम के उप निदेशक से यूनियन प्रतिनिधियों की बैठक हुई। 

जिसमें उन्होंने कर्मियों को मांगों को लेकर एक सप्ताह के भीतर यूनियन, एनएचएम व मेडस्वान कंपनी प्रबंधन के मध्य बैठक का आयोजन करके मांगों का समाधान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर किए व नौकरी से निकाले गए कर्मियों को बहाल करने की पहलकदमी की जाएगी तथा वर्तमान हड़ताल के दौरान प्रताड़ित किए गए मजदूरों की प्रताड़ना पर रोक लगाई जाएगी। 

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार व महासचिव बालक राम ने कहा कि मुख्य नियोक्ता नेशनल हेल्थ मिशन के अंतर्गत कार्यरत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे सैंकड़ों पायलट, कैप्टन व ईएमटी कर्मचारी भयंकर शोषण के शिकार हैं। 

शोषण का आलम यह है कि इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं मिलता है। इन कर्मचारियों से बारह घंटे डयूटी करवाई जाती है परंतु इन्हें ओवरटाइम वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला व श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद भी पिछले कई वर्षों से इन कर्मचारियों का शोषण बरकरार है। जब मजदूर अपनी यूनियन के माध्यम से अपनी मांगों के समाधान के लिए आवाज बुलंद करते हैं तो उन्हें मानसिक तौर व अन्य माध्यमों से प्रताड़ित किया जाता है। 

यूनियन के नेतृत्वकारी कर्मचारियों का या तो तबादला कर दिया जाता है या फिर उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करके नौकरी से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना कारण ही कई - कई महीनों तक डयूटी से बाहर रखा जाता है। उन्हें डराया धमकाया जाता है। उन्हें नियमानुसार छुट्टियां नहीं दी जाती हैं। 

इनके ईपीएफ व ईएसआई के क्रियान्वयन में भी भारी त्रुटियां हैं। ईपीएफ के दोनों शेयर कर्मचारियों से ही काट कर कर्मचारियों को हर महीने दो हजार रुपए का चूना लगाया जा रहा है। कुल वेतन में इनका मूल वेतन बेसिक सेलरी भी कम है। अन्य सभी प्रकार के श्रम कानूनों का भी घोर उल्लंघन हो रहा है। मेडस्वेन फाउंडेशन से पूर्व ये कर्मचारी जीवीके ईएमआरआई के पास कार्यरत थे। 

जीवीके ईएमआरआई कंपनी से नौकरी से छंटनी अथवा सेवा समाप्ति पर इन कर्मचारियों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे व अन्य प्रकार के एरियर का भुगतान नहीं किया गया। इस तरह ये कर्मचारी भयंकर रूप से शोषित हैं। उन्होंने मांग की है कि कर्मचारियों को सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाए। 

बारह घंटे कार्य करने पर नियमानुसार डबल ओवरटाइम वेतन का भुगतान किया जाए। कर्मचारियों को नियमानुसार सभी छुट्टियों का प्रावधान किया जाए। गाड़ियों की मेंटेनेंस व इंश्योरेंस के दौरान कर्मचारियों का वेतन न काटा जाए व कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाए। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट शिमला व श्रम विभाग के न्यूनतम वेतन के संदर्भ में आदेशों को तुरंत लागू किया जाए। 

उन्होंने कहा कि ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 व औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के प्रावधानों को दरकिनार करके यूनियन नेताओं की प्रताड़ना की जा रही है। जब मजदूर अपनी यूनियन के माध्यम से अपनी मांगों के समाधान के लिए आवाज बुलंद करते हैं तो उन्हें मानसिक तौर व अन्य माध्यमों से प्रताड़ित किया जाता है। 

यूनियन के नेतृत्वकारी कर्मचारियों का या तो तबादला कर दिया जाता है या फिर उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करके नौकरी से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना कारण ही कई - कई महीनों तक डयूटी से बाहर रखा जाता है। उन्हें डराया धमकाया जाता है। इसे तुरंत बंद किया जाए तथा कर्मचारियों को संविधान के अनुच्छेद 19 व अनुच्छेद 21 के तहत प्राप्त अधिकारों की रक्षा की जाए। उनके तबादलों को तुरंत रद्द किया जाए। 

कर्मचारियों के ईपीएफ व ईएसआई के क्रियान्वयन में भी भारी त्रुटियां हैं। इन्हें तुरंत दुरुस्त किया जाए। कुल वेतन में कर्मचारियों का मूल वेतन बेसिक सेलरी भी कम है। इसे दुरुस्त किया जाए। मेडस्वेन फाउंडेशन से पूर्व ये कर्मचारी जीवीके ईएमआरआई के पास कार्यरत थे। इन कर्मचारियों को सेवा की निरंतरता व वरिष्ठता की सुविधा दी जाए। 

जीवीके ईएमआरआई कंपनी से कई वर्षों की नौकरी के उपरांत छंटनी अथवा सेवा समाप्ति पर इन कर्मचारियों को जो छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे व अन्य सुविधाओं का भुगतान नहीं किया गया है, उसका तुरंत भुगतान किया जाए। मेडस्वान फाउंडेशन व जीवीके ईएमआरआई के पास नौकरी के दौरान कर्मचारियों को जो कम वेतन भुगतान किया गया है, उसके कानूनी एरियर का तुरंत भुगतान किया जाए। सभी प्रकार के कानूनों को लागू किया जाए।

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