दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे पर बनेगा देश का पहला ट्रांस-बाउंड्री टाइगर रिजर्व , वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे से जुड़ा एक बड़ा और अनोखा कदम सामने आया है। इस एक्सप्रेस वे के आसपास देश का पहला ट्रांस-बाउंड्री टाइगर रिजर्व विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना खासतौर पर राजाजी टाइगर रिजर्व और आसपास के वन क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक सुरक्षित वन्यजीव कॉरिडोर तैयार करेगी। इसका उद्देश्य बाघ, हाथी और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है

Apr 17, 2026 - 19:11
Apr 17, 2026 - 20:02
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दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे पर बनेगा देश का पहला ट्रांस-बाउंड्री टाइगर रिजर्व , वन्यजीव संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
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यंगवार्ता न्यूज़ - देहरादून  17-04-2026
दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे से जुड़ा एक बड़ा और अनोखा कदम सामने आया है। इस एक्सप्रेस वे के आसपास देश का पहला ट्रांस-बाउंड्री टाइगर रिजर्व विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना खासतौर पर राजाजी टाइगर रिजर्व और आसपास के वन क्षेत्रों को जोड़ते हुए एक सुरक्षित वन्यजीव कॉरिडोर तैयार करेगी। इसका उद्देश्य बाघ, हाथी और अन्य जंगली जानवरों की आवाजाही को सुरक्षित बनाना है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपने प्राकृतिक आवास में विचरण कर सकें। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर एलिवेटेड रोड के रूप में बने 12 किमी लंबे वन्यजीव गलियारे से वन्यजीवों की सुगम, सुरक्षित आवाजाही के बाद अब इनकी सुरक्षा को लेकर गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में उत्तराखंड ने देश के पहले ट्रांस बाउंड्री टाइगर रिजर्व की अवधारणा रखी है। 

इसके लिए अब जल्द ही उत्तराखंड , उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक स्तर की बैठक होगी। गौर हो कि यह वन्यजीव गलियारा उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व और उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग के मध्य से गुजरता है। वन्यजीवों की आवाजाही से यह गलियारा जीवंत भी हो चुका है। अब राजाजी के वन्यजीव शिवालिक वन क्षेत्र से होते हुए हिमाचल और फिर हरियाणा के कलेसर राष्ट्रीय उद्यान तक आ-जा सकते हैं। यही नहीं, कार्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व की इस क्षेत्र से लगी चिल्लावाली, धौलखंड रेंजों में पांच और बाघ छोड़ने का निर्णय भी लिया गया है। ऐसे में इन बाघों का मूवमेंट हिमाचल और हरियाणा तक हो सकता है। कॉर्बेट फाउंडेशन के शासी निकाय की बैठक में भी विषय उठा और इसके लिए ट्रांस बाउंड्री टाइगर रिजर्व की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया। पहले चरण में इसके लिए उत्तराखंड, हिमाचल व उत्तर प्रदेश के मध्य कार्यवाही किए जाने का निश्चय किया गया। 
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इसके लिए तेजी से कदम उठाने पर जोर दिया। बैठक में तय किया गया कि जल्द ही इसके लिए तीनों राज्यों के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों के स्तर पर मंथन होगा। फिर शासन और इसके बाद तीनों राज्यों के मंत्रियों के स्तर पर विमर्श किया जाएगा। तत्पश्चात इस रिजर्व का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। इसके बनने पर यह देश का ऐसा पहला टाइगर रिजर्व होगा। वन मंत्री उनियाल ने कार्बेट फाउंडेशन की बैठक से पहले कार्बेट टाइगर रिजर्व के लिए छह वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इनमें दो रेस्क्यू वाहन और चार बोलेरो कैंपर हैं, जो आइसीआइसीआइ बैंक फाउंडेशन ने उपलब्ध कराए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक्सप्रेस वे निर्माण के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई अंडरपास और ओवरपास बनाए जा रहे हैं। 
इससे सड़क हादसों में कमी आएगी और जानवरों की जान बच सकेगी। यह पहल भारत में पहली बार इस स्तर पर लागू की जा रही है, जहां सड़क परियोजना और वन्यजीव संरक्षण को साथ-साथ संतुलित किया जा रहा है। इसे भविष्य की परियोजनाओं के लिए एक मॉडल के रूप में भी देखा जा रहा है। वन विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस ट्रांस-बाउंड्री टाइगर रिजर्व से न सिर्फ जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता है, और इसी दिशा में यह योजना एक अहम कदम साबित होगी।

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