40 हजार से अधिक छात्रों की करियर पर भारी सरकार की सियासी चतुराई,केंद्रीय कानून,संसद का हो रहा अपमान ..

संवैधानिक संशोधन के जरिए केंद्रीय कानून से हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का कानूनी दर्जा तो मिल गया है लेकिन डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत गया, यह कानून हिमाचल में लागू नहीं हो पाया है..इसे लगातार अटकाने, भटकाने, लटकाने और कानूनी दांव पेंच में उलझा कर रख दिया

Jul 23, 2025 - 19:27
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40 हजार से अधिक छात्रों की करियर पर भारी सरकार की सियासी चतुराई,केंद्रीय कानून,संसद का हो रहा अपमान ..
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सर्टिफिकेट के अभाव में स्कॉलरशिप से वंचित रह रहे छात्र..

हाटी समाज ने लगाई सरकार से कोर्ट में प्रमुखता से पैरवी करने की गुहार..

बड़ा सवाल, नेताओं की बेरुखी के कारण अब क्या फिर से देवी देवताओं की शरण में जाएंगे हाटी?

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला     23-07-2025

संवैधानिक संशोधन के जरिए केंद्रीय कानून से हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का कानूनी दर्जा तो मिल गया है लेकिन डेढ़ वर्ष से अधिक समय बीत गया, यह कानून हिमाचल में लागू नहीं हो पाया है..इसे लगातार अटकाने, भटकाने, लटकाने और कानूनी दांव पेंच में उलझा कर रख दिया है.. इस समुदाय के हितों की पैरवी करने वाले सबसे बड़े संगठन केंद्रीय हाटी समिति की शिमला इकाई ने इसे कानून और संसद का अपमान करार दिया है। 

समिति की शिमला इकाई के अध्यक्ष डॉ. रमेश सिंगटा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष दलीप सिंगटा,मीडिया प्रभारी अनुज शर्मा ने कहा कि कानून लागू न होने और राज्य सरकार का लटकाऊ रवैया, सियासी चतुराई  40000 से अधिक छात्रों के कैरियर पर भारी पड़ रही है। शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति सर्टिफिकेट के अभाव में इन छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप से वंचित रहना पड़ रहा है। 

यही नहीं जिन अभ्यर्थियों ने एसटी से आवेदन किए थे वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण भी हो गए, लेकिन सर्टिफिकेट ना मिलने के कारण उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है.. पहले जिन व्यक्तियों ने एसटी कोटे से क्वालीफाई किया ,उन्हें नए सिरे से सामान्य वर्ग से आवेदन करना पड़ा और दोबारा तैयारी करनी पड़ी। सियासत की चक्की में इन छात्रों के हित कुचले ले जा रहे हैं। 

राज्य सरकार ने केंद्रीय कानून को लागू करने की बजाय इसकी व्याख्या ही गलत की.. लॉ डिपार्टमेंट की ओपिनियन ली गई.. जबकि केंद्रीय कानून में राज्य का महकमा एक शब्द भी ना तो जोड़ सकता था और ना ही हटा सकता था। इसी को आधार मानकर कुछ लोगों को कोर्ट में भेजा गया,ताकि मामला लटकाया जा सकें।

हाटी समिति शिमला में प्रदेश के राज्यपाल से पूरे मामले में दखल देने की गुहार लगाई है। जब हाटी बिल राज्यसभा में लंबित था उस वक्त भी राज्यपाल के हस्तक्षेप से ही सुलझ पाया था। समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने और कोर्ट में केस की प्रमुखता से पैरवी करने की मांग उठाई है। 

समिति ने राज्य सरकार  से भी आग्रह किया है कि वह इस मामले की हिमाचल हाईकोर्ट में प्रमुखता से पैरवी करें.. समिति के अनुसार राज्य सरकार ने कोर्ट से हटाए गए मुख्य संसदीय सचिवों की विधानसभा सदस्यता बचाने के लिए शीर्ष कोर्ट में प्रमुखता से पैरवी की, फिर हाटी समुदाय के साथ क्यों भेदभाव किया जा रहा है? 

हाटी समिति देवी देवताओं की सत्ता को सर्वोच्च मानती है, देवीय संकल्प और सामूहिक निर्णय के कारण ही पहले भी आंदोलन हुए थे और अगर अब और अड़चनें आई तो हाटी फिर से देवी देवताओं की शरण में जाएंगे..

हाटी समिति शिमला ने केंद्रीय कानून बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह,पूर्व सीएम जयराम ठाकुर, पूर्व विधायक बलदेव तोमर का आभार जताया। करीब 6 दशक तक मुद्दे को जिंदा रखने, आंदोलनरत रहने वाले सभी पुरोधाओं के योगदान को भी अविस्मरणीय बताया। 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ पदाधिकारियों महासचिव खजान ठाकुर, मीडिया प्रभारी अनुज शर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सर्वश्री दलिप सिंगटा, कपिल चौहान, सचिव मदन तोमर, मोहन चौहान,खजान ठाकुर, पूर्व महासचिव अतर तोमर, मदन ठाकुर, चमेल चौहान, दिनेश चौहान शामिल रहे।

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