एसएफआई का एक डेलिगेशन शिक्षा सचिव से मिला

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा सचिव राकेश कंवर से आज एसएफआई का राज्य नेतृत्व छात्रों के मुद्दों को लेकर मिला जिसमें राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर राज्य सचिव सन्नी सेकटा राज्य उपाध्यक्ष रितेश राज्य सचिवालय से दीपक, विवेक नेहरा,कृतिका नेगी और मुकेश मौजूद थे।

Jun 5, 2026 - 20:44
 0  4
एसएफआई का एक डेलिगेशन शिक्षा सचिव से मिला

यंगवार्ता न्यूज शिमला 5 जून, 2026 : 

हिमाचल प्रदेश के शिक्षा सचिव राकेश कंवर से आज एसएफआई का राज्य नेतृत्व छात्रों के मुद्दों को लेकर मिला जिसमें राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर राज्य सचिव सन्नी सेकटा राज्य उपाध्यक्ष रितेश राज्य सचिवालय से दीपक, विवेक नेहरा,कृतिका नेगी और मुकेश मौजूद थे। इस मुलाक़ात में छात्रों के मुद्दों जिसमें प्रमुख तौर पर जो हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में प्रति कुलपति के पद को फिर से न भरनें और विश्वविद्यालय में हुई फीस वृद्धि के खिलाफ बात रखी गयी।

इस मुलाक़ात में बात रखते हुए SFI नें कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारणी परिषद नें  28 मार्च 2026 को प्रदेश के महाविद्यालय और विश्वविद्यालय में 25% फीस बढ़ोतरी का निर्णय लिया है। जिसका SFI राज्य कमेटी विरोध कर रही है। एसएफआई का मानना है कि यह सीधे तौर पर छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने का काम  किया है जिससे आने वाले समय में प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में इसका प्रभाव  पड़ेगा।  हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में जो संसाधनों का दुरूपयोग किया जा रहा है उस पर रोक लगाने की ज़रूरत है।

SFI सरकार से यह मांग कर रही है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में प्रति कुलपति (Pro-Vice-Chancellor) का पद आगे न भरा जाए और इसे खत्म करने पर विचार किया जाए। एक तरफ यूनिवर्सिटी की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, दूसरी तरफ विश्वविद्यालय इसका हवाला देकर छात्रों की फीस बढ़ानें का काम किया जा रहा है। जिसकी कारण  गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों पर बोझ पड़ रहा है। इसी कारण इस सत्र में विश्वविद्यालय में कई कोर्सों में दाखिले भी कम हुए हैं।


प्रो-वाइस चांसलर के पद पर काफी खर्च होता है—वेतन, सरकारी गाड़ी, ड्राइवर, सुरक्षा कर्मी, निजी सचिव और अन्य स्टाफ पर।
SFI का कहना है कि इस पद की शक्तियां सीमित हैं क्योंकि बड़े फैसले आखिरकार वाइस चांसलर ही लेते हैं। सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, मंडी बनने के बाद HPU का कार्यक्षेत्र भी पहले से कम हो गया है। 1970 में HPU की स्थापना के बाद यह पद लंबे समय तक खाली रहा और विश्वविद्यालय तब भी सामान्य रूप से चलता रहा। इसलिए इस पद पर होने वाला खर्च छात्रों के हित में दूसरी जगह लगाया जा सकता है, जिसमें छात्रवृत्तियां (Scholarships) रिसर्च सुविधाएं,शैक्षणिक ढांचा (Infrastructure) और 
छात्र कल्याण योजनाएं आदि।

अतः SFI राज्य कमेटी मांग करती है कि वर्तमान प्रो-वाइस चांसलर का कार्यकाल पूरा हो चुका है और विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति हो चुकी है, इसलिए  प्रति- कुलपति के पद पर नए व्यक्ति की नियुक्ति न की जाए। SFI का तर्क है कि जब छात्रों की फीस बढ़ाई जा रही है, तब एक महंगे प्रशासनिक पद को बनाए रखना उचित नहीं है। उस पैसे का उपयोग सीधे छात्रों के हित में प्रयोग किया जाना चाहिए।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow