धार चांदना के पाबुच पंडित नागचंद शर्मा के पास मिला हजारों वर्ष प्राचीन पाण्डुलिपि में पाबुची लिपि का भंडार

उपमंडल संगडाह उपतहसील हरिपुरधार के अन्तर्गत तहसील कुपवी गाँव धार चांदना के पाबुच पंडित नागचंद शर्मा के पास  मिली हजारों वर्ष प्राचीन पाण्डुलिपि मे पाबुची लिपि का भंडार जिसमे छिपा हे सात पीढ़ियों का इतिहास

Feb 13, 2026 - 10:54
Feb 13, 2026 - 10:59
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धार चांदना के पाबुच पंडित नागचंद शर्मा के पास मिला हजारों वर्ष प्राचीन पाण्डुलिपि में पाबुची लिपि का भंडार
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लालसिंह - हरिपुरधार    13-02-2026

उपमंडल संगडाह उपतहसील हरिपुरधार के अन्तर्गत तहसील कुपवी गाँव धार चांदना के पाबुच पंडित नागचंद शर्मा के पास  मिली हजारों वर्ष प्राचीन पाण्डुलिपि मे पाबुची लिपि का भंडार जिसमे छिपा हे सात पीढ़ियों का इतिहास ओर प्राचीन वास्तुदोष ज्योतिष विज्ञान जिसका निदान वा दोष निवारण किया जाता है। सांचा विधा के अन्तर्गत ओर प्राचीन दोष का निवारण निकाल कर समाधान दूर किया जाता है। 

हवन-पूजन के माध्यम से सप्त पीढ़ियों दोष निवारण किया जाता है। जैसे भूमि दोष का निवारण विधिवत पूजन कार्य से किया जाता है। यह पाबुच पंडित राज पुरोहित ब्राह्मण परिवार से हे इनको राजा महाराजाधिराज लोग अपने साथ राजस्थान जेसलमेर से अपने साथ लेकर आए थे और यह पाबुच पंडित जिला सिरमौर हिमाचल प्रदेश तहसील शिलाई के गांव खडकांह. जिला शिमला के तहसील कुपवी के गाँव धार चांनणा मे बसाया गया। 

जिसके माध्यम से यह ज्योतिष गणित शास्त्र अनुसंधान का काम करते हे इनके पास दुर्लभ सांचा विधा विद्यमान हे जहां जहां भी यह लोग गये वहां वहां यह सुप्रसिद्ध विद्वान इस सांचा विधा को साथ लेकर अपने बच्चो को संपूर्ण रूप से सिखाते रहे ओर सिरमौर के गाँव खडकाहां में वर्तमान मे पाबुच पंडित रमेश शर्मा बेणी राम, महेंद्र सिंह, जबलोग मे पाबुच पंडित शिवानंद,हेतराम, अमर सिंह, अमर दत्त, मोहन लाल ओर गांव धार चांदना से पंडित नागचंद पाबुच आदि। 

इस दौरान पाबुच पंडित नागचंद जी ने हिमाचल प्रदेश सरकार से गुहार लगाई की अब यह लिपि प्राय लुप्त होने के कगार पर हे ओर यदि सरकार हिमाचल प्रदेश इस लिपि को महत्व देना चाहिए और कुछ स्थानो पर पाठशालाओ का प्रावधान किया जाए। ताकि यह प्राचीन दुर्लभ पाबुची लिपि जीवित रहे ओर इस लिपि से ब्राह्मण पंडित को रोजगार का सृजन हो सके और यह लिपि जीवित रह सके। 

पाबुच पंडित नागचंद ने शिरगुल महाराज के बारे मे बखान किया की जब राजा भुकडू महाराज के संतान सुख का लाभ नही हुआ। तब महाराज भुकडू ने इस लिपि के माध्यम से पाबुच पंडित के पास जाकर संतान का सुख प्राप्त किया ।

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