त्रिलोकपुर के जंगल में अवैध खैर कटान , जड़ें तक उखाड़ ले गए खेर माफिया , वन विभाग का कटान से इनकार 

सिरमौर जिला में नाहन विधानसभा क्षेत्र के त्रिलोकपुर जंगल में अवैध खैर कटान का मामला सामने आया है। सेंकड़ों पेड़ों का अवैध तरीके से कटान किया गया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीने से यहाँ अवैध तरीके से पेडों का कटान किया जा रहा था। अवैध कटान के बाद यहां खैर माफिया जड़ें तक उखाड़ ले गया माफिया जमीन से तीन फीट तक खोदाई कर पेड़ काटे गए है जिससे जंगल मे गहरे खड्डे बने हुए देखे जा सकते है

Mar 29, 2025 - 19:36
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त्रिलोकपुर के जंगल में अवैध खैर कटान , जड़ें तक उखाड़ ले गए खेर माफिया , वन विभाग का कटान से इनकार 
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  29-03-2025
सिरमौर जिला में नाहन विधानसभा क्षेत्र के त्रिलोकपुर जंगल में अवैध खैर कटान का मामला सामने आया है। सेंकड़ों पेड़ों का अवैध तरीके से कटान किया गया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीने से यहाँ अवैध तरीके से पेडों का कटान किया जा रहा था। अवैध कटान के बाद यहां खैर माफिया जड़ें तक उखाड़ ले गया माफिया जमीन से तीन फीट तक खोदाई कर पेड़ काटे गए है जिससे जंगल मे गहरे खड्डे बने हुए देखे जा सकते है यहाँ कई बीघा भूमि पर पेड़ों के अवशेष व जड़ें मौजूद है जो साफ दर्शाता है कि यहां बड़े स्तर पर कटान हुआ है। 
जंगल झाड़ी किस्म से खैर आदि पेड़ों के कटान पर रोक है। इसमें चाहे भूमि मलकीयत हो या फिर सरकारी हो, खैर का पेड़ नहीं काटा जा सकता। मौजा त्रिलोकपुर में जिस भूमि में खैर कटान हुआ है, वह मलकीयत बताई जा रही है। भूमि की किस्म जंगल झाड़ी है। खैर की लकड़ी की बाजार में बड़ी मांग है। इसकी कीमत लाखों में रहती है। वही मामले में वन विभाग अवैध कटान से सीधे तौर पर इंकार कर रहा है जो मामले की गंभीरता को बढ़ाता है ऐसे में सवाल यह भी खड़ा होता है कि क्या यहां से सामने आई तस्वीरें झूठ बोल रही है या वन विभाग के अधिकारी।

डीएफओ अवनी भूषण राय ने बताया कि मौजा त्रिलोकपुर में निजी भूमि में खैर कटान की जांच की जा रही है और अभी तक की जांच में अवैध कटान सामने नहीं आया है। हैरानी इस बात की है कि यदि इतने बड़े स्तर पर यहां खेर का कटान हुआ है तो वन विभाग को इस बात की खबर क्यों नहीं लगी और जब यहां से अवैध कटान की तस्वीरें सामने आई तो वन विभाग कटान से इनकार क्यों कर रहा है। बाजार में खैर की लकड़ी की कीमत लाखों रुपए में है। सवाल यह भी है कि खैर लकड़ी की सप्लाई कहां की जा रही है यह भी विभाग के लिए एक जांच का विषय है।

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