न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से हिमाचल के हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रसायन-मुक्त खेती पद्धति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं, मक्की, जौ, हल्दी और अदरक की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में उल्लेखनीय वृद्धि की

Apr 21, 2026 - 15:45
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न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि से हिमाचल के हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ 
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए राज्य सरकार ने प्राकृतिक पद्धति से तैयार खाद्यान्नों की एमएसपी में की वृद्धि

यंगवार्ता न्यूज़  - शिमला    21-04-2026

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रसायन-मुक्त खेती पद्धति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने प्राकृतिक रूप से उत्पादित गेहूं, मक्की, जौ, हल्दी और अदरक की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में उल्लेखनीय वृद्धि की है। सरकार के इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

गेहूं की एमएसपी को 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। मक्की की एमएसपी को 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तथा चम्बा ज़िले की पांगी घाटी में पैदा होने वाली जौ की एमएसपी को 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। 

कच्ची हल्दी की एमएसपी में भी बड़ी बढ़ोतरी करते हुए इसे 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक रूप से उगाई गई अदरक को राज्य सरकार 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदेगी।

राजीव गांधी प्राकृतिक खेती प्रोत्साहन योजना के तहत सरकार ने इस वर्ष लगभग 2,000 किसानों से 400 मीट्रिक टन गेहूं, 250 मीट्रिक टन मक्की, 150 मीट्रिक टन कच्ची हल्दी और 30 मीट्रिक टन जौ की खरीद करने की योजना तैयार की है। इसके साथ-साथ अदरक की खरीद के लिए भी आकलन किया जा रहा है। 

सरकार ने इस कार्य योजना के लिए 6.95 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। इससे प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को आर्थिक लाभ सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का कहना है कि राज्य सरकार रसायन-मुक्त एवं सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 

कृषि विभाग ने वर्ष 2026 तक एक लाख किसानों को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह राज्य में सतत कृषि की दिशा में एक मील पत्थर साबित होगा। वर्तमान में राज्य में दो लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं, जिनमें से लगभग 1.98 लाख को प्रमाणित किया जा चुका है। 

हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। यहां लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और करीब 53.95 प्रतिशत लोग अपनी आजीविका के लिए प्रत्यक्ष तौर पर कृषि क्षेत्र पर निर्भर हैं। यह क्षेत्र राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 14.70 प्रतिशत का योगदान दे रहा है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसान-केंद्रित नीतियां और प्रगतिशील पहलें भविष्य में भी सतत विकास को बढ़ावा देंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगी।

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