भांग के पौधों के रसायन 24 रोगों के उपचार में सहायक : कृषि एवं पशुपालन मंत्री 

कृषि एवं पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने कहा है कि भांग के पौधों के रसायन 24 रोगों के उपचार में सहायक होते हैं। वह धर्मशाला स्थित भू-संरक्षण अधिकारी कार्यालय के सभागार में हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती, फॉल आर्मी वर्म के प्रदेश में फैलाव और फसलों में स्टंट रोग के विषय में अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक

Aug 7, 2025 - 13:56
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भांग के पौधों के रसायन 24 रोगों के उपचार में सहायक : कृषि एवं पशुपालन मंत्री 
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यंगवार्ता न्यूज़ - धर्मशाला    07-08-2025

कृषि एवं पशुपालन मंत्री चौधरी चंद्र कुमार ने कहा है कि भांग के पौधों के रसायन 24 रोगों के उपचार में सहायक होते हैं। वह धर्मशाला स्थित भू-संरक्षण अधिकारी कार्यालय के सभागार में हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती, फॉल आर्मी वर्म के प्रदेश में फैलाव और फसलों में स्टंट रोग के विषय में अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में संबोधित कर रहे थे। 

कृषि मंत्री ने अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों से कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं तथा कृषि उत्पादन को बढ़ाने एवं कीटों से बचाव की जानकारी किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने भांग की खेती के बारे में उपस्थित अधिकारियों के साथ विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। चंद्र कुमार ने कहा कि भांग की खेती पर पायलट अध्ययन को मंजूरी दी गई है। 

यह अध्ययन भांग की खेती के विषय में भविष्य की रूपरेखा का मूल्यांकन और सिफारिश करेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भांग की खेती को कानूनी तौर पर आरंभ करने को लेकर नियम निर्धारित किए जा रहे हैं। इन नियमों पर मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा कर मंजूरी देना प्रस्तावित है। भांग के पौधों को दवाओं के अलावा इससे प्राप्त होने वाले फाइबर को कपड़ा उद्योग और हस्तशिल्प उत्पादों में भी उपयोग में लाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ किसानों को फसलों में जैविक विधि से कीट प्रबंधन की जानकारी दें। इस अवसर पर चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. राजन कटोच ने बताया कि एक एकड़ भांग की खेती से 10 क्विंटल फाइबर प्राप्त किया जा सकता है। जिसे विभिन्न कपड़ा एवं अन्य उत्पादों में उपयोग में लाया जा सकता है। 

डॉ. अजय कुमार सूद ने प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर फसलों में फॉल आर्मी वर्म कीट के प्रसार बारे जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष जून से अक्तूबर माह के दौरान यह कीट विशेषकर मक्की की फसल पर प्रभाव डालता है।

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