संकट की घड़ी में शकुंतला देवी के लिए सहारा बना हिमाचल भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड

ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसी घटनाएं घटती हैं जिनसे पार पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। जिला ऊना के ठठल गांव की शकुंतला देवी के जीवन में भी ऐसा संकटपूर्ण क्षण तब आया, जब एक सड़क दुर्घटना में उनके पति रमन कुमार का दुखद निधन हो गया

Jun 29, 2025 - 11:31
Jun 29, 2025 - 11:32
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संकट की घड़ी में शकुंतला देवी के लिए सहारा बना हिमाचल भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड
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पति की अकस्मात मृत्यु पर मिली 4.20 लाख रुपये की आर्थिक मदद

यंगवार्ता न्यूज़ - ऊना     29-006-2025

ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसी घटनाएं घटती हैं जिनसे पार पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। जिला ऊना के ठठल गांव की शकुंतला देवी के जीवन में भी ऐसा संकटपूर्ण क्षण तब आया, जब एक सड़क दुर्घटना में उनके पति रमन कुमार का दुखद निधन हो गया। परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य चला गया और पूरे घर पर दुख और चिंता के बादल छा गए।

ऐसे कठिन समय में हिमाचल प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड शकुंतला देवी के लिए संबल बनकर सामने आया।  रमन कुमार एक निर्माण इकाई से संबद्ध थे और इस नाते कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत थे। उनके असामयिक निधन के बाद बोर्ड ने 4.20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की, जो न केवल परिवार के लिए तत्काल सहारा बनी, बल्कि उनके दो बेटों और एक बेटी की शिक्षा तथा पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने की बुनियाद भी साबित हुई।

शकुंतला देवी बताती हैं कि पति की अचानक मौत के बाद वे पूरी तरह टूट चुकी थीं, भविष्य को लेकर मन में डर और असमंजस था। लेकिन कामगार कल्याण बोर्ड की ओर से मिली सहायता ने न सिर्फ उन्हें जीवन की नई दिशा दी, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है।
उनके बच्चे अब उच्च शिक्षा की तैयारी में जुटे हैं और घर की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। वे भावुक होकर कहती हैं कि यह सहायता उनके लिए बहुत बड़ा सहारा बनी।

शकुंतला देवी मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और कामगार कल्याण बोर्ड के प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि बोर्ड की योजनाएं सच्चे मायनों में जरूरतमंदों के लिए राहत और संबल हैं।

हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरवेद सिंह कंवर का कहना है कि सरकार का उद्देश्य यही है कि प्रदेश का कोई भी श्रमिक अपनी सामाजिक और पारिवारिक ज़रूरतों के लिए अकेला महसूस न करे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में  बोर्ड पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के तहत श्रमिकों को सहायता पहुंचा रहा है और सभी जिलों में क्रियान्वयन की सतत निगरानी की जा रही है। 

स्वास्थ्य, विवाह, पेंशन और आवास जैसे क्षेत्रों में वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। ऊना जिले में पंजीकृत सैकड़ों श्रमिक इन योजनाओं से लाभान्वित हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि सभी लाभार्थियों को पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के तहत योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।

इन योजनाओं में शादी के लिए वित्तीय सहायता-लाभार्थी के स्वयं के विवाह तथा दो बच्चों के विवाह के लिए 51- 51 हज़ार, मातृत्व और पितृत्व प्रसुविधा के तहत महिला लाभार्थी को प्रसव अवधि के समय अथवा बच्चे के जन्म पर 25 हज़ार, पंजीकृत कर्मकार की पत्नी को दो प्रसवों तक 6 हज़ार, पुरूष लाभार्थी को पितृत्व सुविधा के तहत बच्चे के जन्म पर 1 हज़ार और महिला लाभार्थी को 90 दिन से 26 सप्ताह तक मातृत्व अवकाश की राशि प्रदान की जाती है। 

चिकित्सा सहायता में लाभार्थी और उसके आश्रितों को चिकित्सा के चिकित्सीय उपचार के लिए 50 हज़ार से 5 लाख, शिक्षा के लिए प्रथम कक्षा से पीएचडी तक 8400 से 1.20 लाख रुपये,  60 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर लाभार्थी को 1 हज़ार रूपये पैंशन सुविधा, दुर्घटना एव बीमारी के चलते हुई विकलांगता की स्थिति में 500 रुपये दिव्यांग पेंशन, कामगार बोर्ड में पंजीकृत सदस्य की मृत्यु होने पर नाम निर्देशितों / उनके आश्रितों को 2 से 4 लाख, अंतिम संस्कार के लिए 20 हज़ार रुपये की आर्थिकी सहायता, बेटी जन्म उपहार योजना के तहत 51 हज़ार रुपये, मानसिक रूप से मंद बच्चों की देखभाल के लिए 20 हज़ार प्रतिवर्ष, विधवा पेंशन योजना के तहत 1500 रूपये प्रतिमाह, होस्टल सुविधा योजना के तहत 20 हज़ार रुपये प्रतिवर्ष, मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 1.50 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाती है।
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