ड्यूटी के दौरान मृत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के परिवार को आर्थिक राहत दें सरकार , वर्कर्स को समय पर नहीं मिल रहा है वेतन 

आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ( सम्बन्धित CITU) ने आज जिला मुख्यालय नाहन में जिला बाल विकास परियोजना अधिकारी के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़ी विभिन्न माँगो को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है जिसमें कई समस्याओं को उजागर किया गया है। मीडिया से बात करते हुई हेल्पर यूनियन की सचिव सीता देवी ने बताया कि मुख्य रूप से ज्ञापन में मांग की जा रही है कि हाल में पल्स पोलियो अभियान में डयूटी के दौरान मंडी जिला में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत हुई है

Jan 8, 2026 - 19:12
Jan 8, 2026 - 19:32
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ड्यूटी के दौरान मृत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के परिवार को आर्थिक राहत दें सरकार , वर्कर्स को समय पर नहीं मिल रहा है वेतन 

यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  08-01-2026
आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स यूनियन ( सम्बन्धित CITU) ने आज जिला मुख्यालय नाहन में जिला बाल विकास परियोजना अधिकारी के जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से जुड़ी विभिन्न माँगो को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है जिसमें कई समस्याओं को उजागर किया गया है। मीडिया से बात करते हुई हेल्पर यूनियन की सचिव सीता देवी ने बताया कि मुख्य रूप से ज्ञापन में मांग की जा रही है कि हाल में पल्स पोलियो अभियान में डयूटी के दौरान मंडी जिला में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत हुई है।  ऐसे में यूनियन उनके परिवार को सरकार से 50 लाख रुपए की आर्थिक मदद प्रदान करने की मांग कर रही है। 
 
साथ ही परिवार के किसी सदस्य को नौकरी दिए जाने की भी माँग है। उन्होंने यह भी कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है जिसके चलते उन्हें परेशानियों पड़ रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार की कार्य उनसे करवाए जा रहे हैं मगर इस एवज में उन्हें उचित मेहनताना नहीं मिल पाता है साथ ही करवाए जाने वाले कार्य का उचित प्रशिक्षण भी नहीं दिया जाता है। कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग किया कि जल्द से जल्द आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान निकाला जाए। गौर हो कि मंडी जिले के टारना वृत्त में 22 दिसंबर 2025 क्रो पल्स पोलियो अभियान की ड्यूटी निभाते समय गिरने से आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर्षा की हुई मृत्यु ने प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को गहरे आक्रोश और पीड़ा में डाल दिया है। 
यह घटना कोई साधारण दुर्घटना नहीं , बल्कि उस लापरवाह व्यवस्था का परिणाम है, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से विभिन्न विभागों का जोखिमपूर्ण कार्य तो कराया जाता है। किसी भी दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में न तो सरकार और न ही संबंधित विभाग इन सबकी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता है। इससे पूर्व में भी ड्यूटी के दौरान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मृत्यु की घटनाएं हो चुकी है। दो वर्ष पूर्व कुल्लू के सैंज क्षेत्र में फिसल कर गिरने तथा जून 2024 में चम्बा ज़िले में मीटिंग में जाते समय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सरला एवं श्रेष्ठा की सड़क दुर्घटना में मृत्यु-इन सभी घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। 
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अत्यंत कम मानदेय पर पल्स पोलियो , बीएलओ ड्यूटी , फेस ट्रैकिंग,  हाउस-टू-हाउस सर्वे जैसे बहु-विभागीय एवं जोखिम पूर्ण कार्य करने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा दी जाती है। ना ही बीमा सुविधा और न ही सामाजिक सुविधा दी जाती है। यह स्थिति संस्थागत शोषण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि कभी केंद्र का वेतन कभी राज्य का चार चार माह तक वेतन  मिलना जानबूझकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रताड़ित करने का और इस योजना को बंद करने की सोची समझी साजिश है। यदि सरकार ने उपरोक्त मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया , तो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आंदोलन को और व्यापक करने के लिए विवश होगी। जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी प्रदेश सरकार एवं संबंधित विभागों की होगी।  

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